बेटे के सिर पर सेहरा नहीं देख पाये मां-बाप

Published at :26 Apr 2017 4:38 AM (IST)
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बेटे के सिर पर सेहरा नहीं देख पाये मां-बाप

शहादत . गांव से लेकर ननिहाल तक लोग मर्माहत जवान की मौत से दुखी था पूरा गांव आरा/जगदीशपुर : बेटे के सिर पर सेहरा देखने का मां- बाप का सपना भी उसकी मौत के साथ दफन हो गया. सीआरपीएफ में जवान के पद पर तैनाती के बाद परिजन काफी खुश थे और घर में उसके […]

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शहादत . गांव से लेकर ननिहाल तक लोग मर्माहत

जवान की मौत से दुखी था पूरा गांव
आरा/जगदीशपुर : बेटे के सिर पर सेहरा देखने का मां- बाप का सपना भी उसकी मौत के साथ दफन हो गया. सीआरपीएफ में जवान के पद पर तैनाती के बाद परिजन काफी खुश थे और घर में उसके शादी की भी चर्चा हो रही थी. ग्रामीणों के अनुसार मसाढ़ गांव में एक बार रिश्ता लगभग तय हो गया था लेकिन किसी कारणवश बात नहीं बन पायी और रिश्ता टूट गया. मृतक के पिता गजेंद्र मिश्र और मां माधुरी देवी ने बेटे की शादी को लेकर कई सपने संजोये थे लेकिन उसकी मौत के साथ सारे सपने खाक में मिल गये.
दो बेटों में बड़ा हो गया शहीद, छोटा है बीए का छात्र : आरा. तुलसी गांव निवासी गजेंद्र मिश्र और माधुरी देवी के दो बेटे अभय मिश्रा और अमित मिश्रा में से बड़ा बेटा अभय नक्सलियों से लोहा लेने में शहीद हो गया. अब छोटा बेटा अमित उनके बुढ़ापे का सहारा है. गजेंद्र मिश्र गांव में काफी छोटे किसान है और आर्थिक रूप से भी स्थिति अच्छी नहीं है. छोटा बेटा अमित एसबी कॉलेज, आरा में बीए पार्ट वन का छात्र है. घटना के बाद छोटा भाई अमित भी दहाड़ मार कर रो रहा था. अमित कह रहा था कि भइया चल गइलन अब हमरा के पढ़े खातिर पइसा के दी ही.
वर्ष 2012 में सीआरपीएफ में बहाल हुआ था अभय : तुलसी गांव के रहनेवाले गजेंद्र मिश्र के पुत्र अभय मिश्रा की ज्वायनिंग सीआरपीएफ में वर्ष 2012 में हुई थी. नियुक्ति के बाद से ही अभय छत्तीसगढ़ में ही तैनात था. लगभग पांच वर्षों से नक्सल प्रभावित इलाकों में उसकी पोस्टिंग रहती थी. अपने कर्तव्य के प्रति भी वह काफी ईमानदार था.
गांव में सबके साथ मिल कर रहता था शहीद जवान : नक्सली हमले में शहीद अभय मिश्रा गांव में सबका चहेता था और सबसे मिल कर रहता था. अपने दोस्तों में तो वह खासा लोकप्रिय था. उसकी मौत से परिवारवालों के साथ उसके गांव के साथी भी कम दुखी नहीं हैं. तुलसी गांव के रहनेवाले और शहीद के मित्र मनीष कुमार ने बताया कि गांव में जब भी अभय मिश्रा आते थे, तो साथियों के लिए कुछ- न- कुछ जरूर लेकर आते थे. उनके व्यवहार से गांव के हर तबके के लोग काफी खुश रहते थे. वहीं गांव के ही अरुण कुमार ने बताया कि आज उनके यहां तिलक आनेवाला था और दोस्त अभय ने शादी में आने का वादा किया था. अचानक हुई इस घटना से शादी का माहौल ही फीका हो गया. उन्होंने बताया कि अभय का व्यवहार काफी मिलनसार था.
दीपावली में आया था गांव, चार दिन पहले पिता से हुई थी बात :
शहीद जवान अभय मिश्रा दीपावली में अपने गांव आया था. परिवार के साथ दीपावली मनाने के बाद होली मनाने का मौका नहीं मिल पाया. मृतक के पिता गजेंद्र मिश्र ने बताया कि होली में बेटे के आने का इंतजार था लेकिन छुट्टी नहीं मिलने के कारण वह नहीं आ पाया. इसी महीने वह शादी को लेकर गांव आनेवाला था लेकिन उससे पहले उसकी मौत की खबर आ गयी. उन्होंने बताया कि चार दिन पहले बेटे से बात हुई थी और उसने गांव पर आने की बात कही थी.
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