ए बाबू घर जाओ, बैंक का खाता नंबर ले आओ

Published at :09 Jan 2016 12:55 AM (IST)
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ए बाबू घर जाओ, बैंक का खाता नंबर ले आओ

प्रारंभिक विद्यालयों में प्रतिदिन भीड़ उमड़ने लगी है. स्कूलों मे नामांकित विद्यार्थियों के माता-पिता व अभिभावक प्रतिदिन बैंकों के खाता नंबर के साथ विद्यालय पहुंचते नजर आ रहे हैं. वहीं विद्यालय में पदस्थापित शिक्षकों पढ़ाई में कम व बैंक खाता नंबर एकत्रित करने में ज्यादा समय गुजरता है. पढ़ाई की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा […]

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प्रारंभिक विद्यालयों में प्रतिदिन भीड़ उमड़ने लगी है. स्कूलों मे नामांकित विद्यार्थियों के माता-पिता व अभिभावक प्रतिदिन बैंकों के खाता नंबर के साथ विद्यालय पहुंचते नजर आ रहे हैं. वहीं विद्यालय में पदस्थापित शिक्षकों पढ़ाई में कम व बैंक खाता नंबर एकत्रित करने में ज्यादा समय गुजरता है. पढ़ाई की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा है. वहीं अभिभावकों के सवाल का जवाब देते-देते मास्टर साहब टेंशन में जी रहे हैं.
आरा : प्रारंभिक स्कूलों में इन दिनों शिक्षक मिशन एकाउंट नंबर कार्य में जुटे हैं. कमोबेश हर विद्यालय में शिक्षक अपने यहां विभिन्न वर्गों में नामांकित बच्चों का खाता नंबर एकत्रित करने में लगे हैं. जिन बच्चों का एकाउंट नंबर नहीं है वहां बच्चों के माता-पिता व उनके अभिभावकों का खाता नंबर लिया जा रहा है. ऐसा इसलिए हो रहा है, ताकि छात्रवृत्ति की आधी बची राशि को बच्चों द्वारा दिये गये खाता नंबरों पर समय पर भिजवाया जा सके.
सभी संकूलों में एक जैसा हाल : सभी संकूलों में एक जैसा हाल है. हर जगह शिक्षक बच्चों के खाता नंबर को जुटाने में लगे हैं.
पदस्थापित शिक्षकों में अधिकतर शिक्षक दिन भर यही काम करते नजर आते हैं. इतना ही नहीं दिन भर स्कूलों में एकाउंटर नंबर की चर्चा ही सुनने को मिल रही है.
स्कूलों में उमड़ रही है भीड़ : हर दिन स्कूलों में पुरुष व महिला अभिभावकों की भीड़ उमड़ती है. हर कोई खाता नंबर चढ़वाने की बेचैनी में दिखता है. दिनभर स्कूलों में गहमा गहमी-सा नजारा दिखता है.
क्या है अभिभावकों की समस्या: अभिभावक खाता खुलवाने बैंकों तक जाते हैं, मगर बैंकों द्वारा कर्मी की कमी व अन्य बहाना बता कर खाता खोलने से इनकार किया जाता है, जिस कारण अभिभावकों की परेशानी बढ़ गयी है.
शिक्षकों को करना है यह काम : स्कूल में पदस्थापित शिक्षकों को योजनाओं की राशि के भुगतान से पूर्व रिपोर्ट बनानी है, जिसमें विद्यार्थी के वर्ग का नाम, रौल नंबर, खाता संख्या, संबंधित बैंकों का आइएफएससी कोड समेत योजना की राशि लिखनी है. वहीं भुगतान से पूर्व अभिभावकों का हस्ताक्षर लेना है.
पढ़ाई की गति हुई है धीमी
सत्र समाप्ति की ओर है जिस कारण शिक्षकों को सिलेबस पूरा करने की बेचैनी है. मगर जब से शिक्षक बैकों का खाता नंबर लेने जैसे काम में जुटे हैं तब से स्कूलों में पढ़ाई की रफ्तार पर थोड़ा ब्रेक लगा है.
नहीं जुटते हैं सभी अभिभावक
ऐसा नहीं है कि सभी अभिभावक एक बार स्कूलों में पहुंच कर अपना खाता नंबर दे देते हैं. अभिभावकों का खाता जैसे-जैसे बैंकों में खुलता है वैसे-वैसे अभिभावक उन खाता नंबरों को लेकर स्कूलों तक पहुंचते हैं. इस कारण अभिभावकों का आने व जाने का सिलसिला जारी रहता है.
क्या हुआ है अभिभावकों को फायदा
जब से अभिभावक यह सुने हैं कि स्कूलों में चलनेवाली योजनाओं की राशि बच्चों को बैंक खाते के माध्यम से दी जायेगी.इसके बाद से हजारों अभिभावकों ने बैंकों का खाता खुलवा लिया है. वहीं सैकड़ों ग्राहकों का वर्षों से बंद खाता अपग्रेड हो गया है.
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