BHAGALPUR : विक्रमशिला सेतु संकट : बीआरओ की टीम ने किया असेसमेंट, क्षतिग्रस्त हिस्से से कुछ दूरी पर पुल की संरचना मजबूत

विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से के बाद आवागमन बहाल करने की कवायद तेज हो गयी है.
भागलपुर से उपमुख्य संवाददाता की रिपोर्ट :
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से के बाद आवागमन बहाल करने की कवायद तेज हो गयी है. सीमा सड़क संगठन यानी बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) ने अब क्षतिग्रस्त हिस्से से हटकर अस्थायी वैकल्पिक मार्ग बनाने की योजना तैयार की है. प्रस्ताव के अनुसार, टूटे हिस्से से करीब सात मीटर पीछे सेतु पर बेली ब्रिज का निर्माण किया जाएगा, जिससे सीमित आवागमन शुरू कराया जा सके. बुधवार को दूसरे दिन भी बीआरओ की टीम ने अभियंताओं के साथ सेतु के ऊपरी और अंदरूनी हिस्सों का गहन निरीक्षण किया. भागलपुर और नवगछिया दोनों छोर पर मशीनों से सतह की जांच की गयी. जांच में यह सामने आया कि क्षतिग्रस्त हिस्से से कुछ दूरी पर पुल की संरचना अपेक्षाकृत मजबूत है. इसी आधार पर बेली ब्रिज का डिजाइन तैयार किया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, डिजाइन फाइनल होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा. इसके लिए आवश्यक उपकरण पश्चिम बंगाल से मंगाए जाएंगे. पूरी प्रक्रिया में करीब 10 दिन का समय लग सकता है, हालांकि अंतिम निर्णय जल्द लिया जाएगा.स्लैब के अंदरूनी हिस्से की संरचना मजबूत
जांच के दौरान यह भी पाया गया कि स्लैब के अंदरूनी हिस्से की संरचना अभी मजबूत स्थिति में है. एनएच के मुख्य अभियंता ने बताया कि तकनीकी टीम विस्तृत जांच में जुटी है. रिपोर्ट अनुकूल रही, तो वैकल्पिक मार्ग के निर्माण की दिशा में तेजी से काम आगे बढ़ेगा. गौरतलब है कि भागलपुर को कोसी, सीमांचल समेत नेपाल और पश्चिम बंगाल से जोड़ने वाले इस सेतु का स्लैब 3 मई की रात गंगा में गिर गया था, जिसके बाद से आवागमन पूरी तरह बाधित है. बीआरओ की टीम मंगलवार को भागलपुर पहुंचते ही घटनास्थल पर असेसमेंट शुरू कर दी थी, जो बुधवार शाम तक पूरा हो गया. टीम अब शुक्रवार तक अपनी रिपोर्ट बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग को सौंपेगी.
अब तक क्या-क्या हुआ
03 मई : विक्रमशिला सेतु का स्लैब देर रात गंगा में समा गया था. इसके बाद आवाजाही पूरी तरह ठप हो गयी.
04 मई : बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष डॉ चंद्रशेखर सिंह ने तीन महीने में काम पूरा होने की बात कही. मुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री से बात कर सेना की मदद मांगी. अभियंताओं की टीम ने जांच की और एलिगेटर क्रेकिंग होने की बात कही.05 मई : बीआरओ की टीम भागलपुर पहुंची और घटनास्थल पर असेसमेंट शुरू किया.
06 मई : बीआरओ की टीम का असेसमेंट हुआ पूरा.घटना का साइड इफेक्ट
–आवागमन में भारी परेशानी–सब्जी और केला किसानों को दिक्कत
–स्कूल व कॉलेज पहुंचने में दिक्कत–मरीजों को जिला मुख्यालय पहुंचने में भारी परेशानी
–नौकरीशुदा लोगों को समय पर दफ्तर पहुंचना मुश्किलआवागमन के लिए घाट पर जिला प्रशासन ने क्या दी है सुविधाएं
–दो स्टीमर और नावों से परिचालन–पेयजल, स्वास्थ्य शिविर, शौचालय
–सुरक्षा के लिए पुलिस टीम की तैनाती–नाव का किराया निर्धारित
–24 घंटे एंबुलेंस की तैनातीबीआरओ की टीम ने क्या किया
बीआरओ की टीम ने निरीक्षण के दौरान सेतु रोड की स्थिति देखी, ताकि यह पता चल सके कि सेतु पर वाहनों का दबाव कितना है. क्षतिग्रस्त हिस्से के आगे के स्लैब की भी जांच की गयी है. नदी में नाव से भ्रमण कर पुल के निचले हिस्से को चारों तरफ से देखा गया कि कहां पर क्या स्थिति है.जल्द आवागमन बहाल होगा : टीम
बीआरओ टीम के सदस्यों ने मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि माॅड्यूल फ्रेब्रिकेटेड स्कीम के तहत टूटे हिस्से को फिर से रिस्टोर करने के लिए वे लोग अधिकारियों के बीच विमर्श कर रहे हैं. पहले वे लोग पुल की स्थिति का विश्लेषण कर रहे हैं. सेतु पर फिर से आवागमन बहाल हो इसके लिए उनलोगों की पूरी टीम पुल निर्माण निगम के साथ काम कर रही है. उम्मीद है जल्द ही उक्त कार्य को सफलतापूर्वक कर लिया जायेगा. अधिकारियों ने लोगों से धैर्य रखने की अपील की है.प्रभात नॉलेज
जानिये क्या है बीआरओ
बीआरओ, रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करनेवाला भारत सरकार का एक प्रमुख निर्माण संगठन है, जो खास तौर पर सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों में सड़क, पुल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का काम करता है. इसमें सेना के इंजीनियर और सिविल विशेषज्ञ दोनों शामिल होते हैं. बीआरओ पर देश के सीमा क्षेत्रों जैसे लद्दाख, अरुणाचल, उत्तराखंड में सड़क निर्माण, सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण रास्तों के विकास व रखरखाव, पुल, सुरंग (टनेल) व एयरफील्ड के निर्माण, आपदा के समय (बाढ़, भूकंप) राहत कार्य व सड़क बहाली के कठिन कार्यों की जिम्मेदारी है. सीमाओं तक तेज और सुरक्षित कनेक्टिविटी बनाने की जिम्मेदारी उठानेवाले बीआरओ की खासियत बेहद कठिन परिस्थितियों (बर्फ, पहाड़, जंगल) में भी काम करने की क्षमता है. कई ऐतिहासिक प्रोजेक्ट जैसे लद्दाख की ऊंचाई पर सड़कें बनाने जैसे कार्य बीआरओ की ओर से किये गये हैं.
क्या होता है बेली ब्रिज
बेली ब्रिज एक पोर्टेबल और पूर्वनिर्मित स्टील ट्रस पुल होता है, जिसे बेहद कम समय में जोड़कर तैयार किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल आमतौर पर आपदा, युद्ध या किसी पुल के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में वैकल्पिक संपर्क बहाल करने के लिए किया जाता है. इस पुल का आविष्कार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश इंजीनियर डोनाल्ड बेली ने किया था. खास बात यह है कि इसे छोटे-छोटे हिस्सों में तैयार कर आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है और मौके पर बिना भारी मशीनों के भी असेंबल किया जा सकता है. बेली ब्रिज हल्का होने के बावजूद मजबूत होता है और भारी वाहनों का भार सहने में सक्षम होता है. यही वजह है कि सेना और बीआरओ जैसी एजेंसियां दुर्गम इलाकों या आपदा के समय इसका तेजी से इस्तेमाल करती हैं. भारत में बाढ़, भूस्खलन या पुल क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में कई जगहों पर बेली ब्रिज बनाकर अस्थायी तौर पर आवागमन बहाल किया जाता है. जरूरत के अनुसार इसे कुछ समय के लिए या लंबे समय तक भी उपयोग में रखा जा सकता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
बीआरओ की टीम द्वारा असेसमेंट पूरा कर लिया गया है. इस टीम की रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद पथ निर्माण विभाग निर्माण का निर्णय लेगा. मुख्यमंत्री का सख्त आदेश है कि यह कार्य जल्द पूरा किया जाये, ताकि लोगों की समस्या दूर हो सके.
— डॉ नवल किशोर चौधरी, डीएम, भागलपुरप्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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