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पनीर चिल्ली-चाउमीन खाने के लिये करते थे साइकिल चोरी, चौथी और पांचवी कक्षा के तीन छात्र पकड़ाये

Updated at : 27 Jan 2019 10:56 PM (IST)
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पनीर चिल्ली-चाउमीन खाने के लिये करते थे साइकिल चोरी, चौथी और पांचवी कक्षा के तीन छात्र पकड़ाये

भागलपुर : लोगों को पेट और गरीबी से निजात पाने के लिये अपराध का रास्ता अपनाने की तो बहुत सारे उदाहरण हैं पर भागलपुर शहर में शनिवार को अपने शौक को पूरा करने के लिये साइकिल चोरी करने वाले एक रइसजादे गिरोह का खुलासा हुआ. एक के पकड़ में आने के बाद पुलिस ने परत […]

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भागलपुर : लोगों को पेट और गरीबी से निजात पाने के लिये अपराध का रास्ता अपनाने की तो बहुत सारे उदाहरण हैं पर भागलपुर शहर में शनिवार को अपने शौक को पूरा करने के लिये साइकिल चोरी करने वाले एक रइसजादे गिरोह का खुलासा हुआ. एक के पकड़ में आने के बाद पुलिस ने परत दर परत साइकिल चोरी करने वाले इस नाबालिग बच्चों के गिरोह के तीन सदस्यों का पर्दाफाश किया. सभी डॉन बॉस्को स्कूल के चौथी और पांचवी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र निकले. पूछताछ के दोरान उन्होंने बताया कि उन्हें पनीर चिल्ली और चाउमीन बहुत पसंद है. घर से हर रोज इसके पैसे नहीं मिलने की वजह से वे लोग मॉल के बाहर से साइकिल चुराते हैं और उसे बेचकर हर पनीर चिल्ली और चाउमीन की पार्टी करते हैं.

इशाकचक थानाध्यक्ष राम एकबाल प्रसाद यादव ने बताया कि शुक्रवार देर शाम उन्हें सूचना मिली कि कचहरी चौक के समीप एक मॉल में 10 वर्षीय बच्चे को साइकिल चुराते हुए लोगों ने पकड़ लिया. जिसके बाद वे खुद मौके पर पहुंचे और रंगेहाथ पकड़े गये बच्चे को लेकर थाना आ गये. पूछ जाने पर बच्चे ने बताया कि वह डॉन बास्को स्कूल के चौथी कक्षा का छात्र है. वह और उसके दो अन्य दो शहर के विभिन्न मॉल के बाहर डिजाइनर साइकिल चोरी करते हैं और उसे बेचकर होटलों में अपने पसंदीदा व्यंजन खाते हैं. छात्र की निशानदेही पर पुलिस ने अन्य दो युवकों को भी पकड़ लिया और उनके घर से चोरी के कुल 7 डिजाइनर साइकिल बरामद किये. सभी के परिजनों को थाना बुलाया गया. जहां साइकिल चोरी करने की कोई शिकायत दर्ज नहीं होने पर उन्हें बांड भरवाकर छोड़ दिया गया. बरामद की गयी साइकिलों में एक साइकिल का मालिक अपनी साइकिल का बिल दिखाने के बाद साइकिल लेकर चला गया. जबकि छह साइकिल अब भी थाना में जप्त हैं. थानाध्यक्ष ने बताया कि पकड़े गये तीन छात्र संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखते हैं. घर से मिलने वाले पैसों से शौक पूरा नहीं होने पर वे साइकिल चोरी करने के बाद उसे बेचकर इसकी भरपायी करते थे.

अपने दोस्तों के घर रखते थे साइकिल
तीनों छात्रों ने बताया कि साइकिल चोरी करने के बाद वे साइकिलों को अपने दोस्तों के घर रख देते थे. उनके दोस्त भी अपने परिजनों को किसी अन्य दोस्त की साइकिल होने की बात कहकर उसे अपने घर में रखते थे. वहीं खरीददार मिलने पर वह पांच से 6 हजार की साइकिलों को 500 रुपये में बेच देते है. और उसी पैसों को वे सारे दोस्त मिलकर होटल-रेस्टोरेंट में पनीर चिल्ली और चाउमीन की पार्टी करते थे.

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