बकाया वसूली में जीरो, चालू वर्ष की कमाई में भी फेल, कैसे होगा विकास
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Oct 2018 7:25 AM
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ऋषि, भागलपुर : नगर निगम की कमाई वाली जारी छमाही रिपोर्ट संबंधित विभाग के काम करने के तरीके को बयां कर रही है. पिछले छह माह से आपसी टशन को लेकर निगम सुर्खियों में रहा है. राजस्व वसूली की बात करें तो यह हर मोर्चे पर विफल नजर आ रहा है. मार्च में निगम के […]
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ऋषि, भागलपुर : नगर निगम की कमाई वाली जारी छमाही रिपोर्ट संबंधित विभाग के काम करने के तरीके को बयां कर रही है. पिछले छह माह से आपसी टशन को लेकर निगम सुर्खियों में रहा है. राजस्व वसूली की बात करें तो यह हर मोर्चे पर विफल नजर आ रहा है. मार्च में निगम के आला अधिकारियों ने वर्ष 2018-19 के आय-व्यय का ब्योरा बनाया.
इसमें पुराने बकाया की वसूली के साथ चालू साल की कमाई का लक्ष्य बनाया. मगर अफसोस, अभी तक बकाया भी वसूला नहीं जा सका है. राजस्व के मामले में बस स्टैंड सूची में है, इस मद में राजस्व के नाम पर बैलेंस जीरो है. निगम को संजीवनी के रूप में दाखिल-खारिज, भवन अनुमति जैसे श्रोत हैं. इनके लक्ष्य तो तय नहीं हुए, राजस्व ठीक-ठाक हुआ है.
छमाही रिपोर्ट के बोलते आंकड़े
इन सभी में अब तक शून्य रही वसूली
आय के श्रोत बकाया
मोबाइल टावर 468.31 लाख
शैरात 8.78 लाख
दुकान से किराया 28.79 लाख
विज्ञापन 55.97 लाख
इन सभी में अब तक शून्य हुआ राजस्व
आय के श्रोत तय लक्ष्य
मोबाइल टावर 28.80 लाख
शैरात 6.00 लाख
बगैर लक्ष्य के दे रहे अच्छी कमाई
आय के श्रोत आया राजस्व
दाखिल-खारिज 0.92 लाख
जन्म-मृत्यु निबंधन 0.14 लाख
भवन अनुमति 13.55 लाख
अन्य अज्ञात श्रोत 28.03 लाख
नहीं होगी कमाई तो नागरिक सुविधाओं पर पड़ेगा असर: नगर निगम क्षेत्र में विकास कार्य उसकी वार्षिक कमाई पर भी निर्भर रहती है. निगम के सामान्य बोर्ड या फिर अन्य विशेष बैठकों में लोगों की मांग पर देने वाली नागरिक सुविधाएं आंतरिक संसाधन पर ही आगे बढ़ती है. अगर निगम अपने तय लक्ष्य के अनुरूप कमाई नहीं करेगा तो फिर नागरिक सुविधाओं पर असर पड़ना लाजिमी है. निगम को अपनी राजस्व को लेकर गंभीर होना पड़ेगा.
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