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यहां बिना न्यौछावर, नहीं गूंजती किलकारी

Updated at : 11 Sep 2024 6:35 PM (IST)
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यहां बिना न्यौछावर, नहीं गूंजती किलकारी

जीएमसीएच का लेबर रूम, जहां बिना न्यौछावर के किलकारी नहीं गूंजती. ये हम नहीं कह रहें. बल्कि मरीज के परिजनों ने अबकी बार पटना में यह शिकायत की हैं.

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बेतिया. जीएमसीएच का लेबर रूम, जहां बिना न्यौछावर के किलकारी नहीं गूंजती. ये हम नहीं कह रहें. बल्कि मरीज के परिजनों ने अबकी बार पटना में यह शिकायत की हैं. राज्य स्वास्थ्य समिति के शिकायत कोषांग में टोल फ्री नंबर 104 पर यह शिकायत की गई हैं. अस्पताल सूत्रों के मुताबिक यह सारा मामला नौ सितंबर का हैं. जब प्रसव के लिए किसी प्रसूता के परिजन से रूपये की मांग की गई थी. परिजन ने भी इसकी शिकायत राज्य स्वास्थ्य समिति के शिकायत कोषांग में कर दी. शिकायत के बाद जीएमसीएच प्रशासन ने पत्र जारी कर लेबर रूम में तीनों शिफ्टों में कार्यरत दस नर्सिंग ऑफिसर्स को हटाकर दूसरे वार्ड में तैनात कर दिया है.

– आखिर क्यों नहीं होती कारवाई

जारी पत्र में लिखी एक बात ने जीएमसीएच प्रशासन को खुद कठघरे में खड़ा कर दिया है. जिसमें अस्पताल प्रशासन द्वारा यह बात स्वीकारी गई है कि पूर्व में भी प्रसव वार्ड से संबंधित अनेकों शिकायत उसे प्राप्त हुई हैं. ऐसे में प्रश्न यह उठता हैं कि जब पूर्व से ही प्रसव वार्ड के संबंध में शिकायत आती थी तो उसपर कारवाई क्यों नहीं हुई. किस वजह से अस्पताल प्रशासन ने वैसी दोषी नर्सों पर कारवाई नहीं की. क्या प्रसव वार्ड में लिए जाने वाले न्यौछावर का हिस्सा कार्यालय को भी जाता हैं. क्यों महीनों व वर्षों से कुछ चुनिंदा नर्सिंग ऑफिसर ही प्रसव वार्ड में तैनात हैं. जब तीन या छह महीने में सभी वार्ड इंचार्ज को बदलने की बात हैं, तो यह बात प्रसव वार्ड में क्यों नहीं लागू होती. अस्पताल के अन्य नर्सिंग ऑफिसरों का कहना हैं कि रोस्टर का रजिस्टर उठाकर देख लिया जाए, कौन कब से लेबर रूम में हैं. पता चल जाएगा. कुछ को 15 दिन या एक महीने के लिए दूसरे वार्ड में भेजा भी जाता हैं, तो वापस से अगले महीने ही लेबर रूम में वापसी हो जाती हैं.

– पहले भी हो चुकी हैं शिकायत

प्रसव वार्ड के संबंध में शिकायत का यह कोई पहला मामला नहीं हैं. इससे पहले भी कई दफा शिकायत हो चुकी हैं. कुछ लोग तो अस्पताल के भू-तल पर स्थित कंट्रोल रूम में भी प्रसव वार्ड के उगाही की शिकायत करते हैं. लेकिन सेटिंग के कारण उस शिकायत को अधीक्षक तक पहुंचने ही नहीं दिया जाता. उगाही चाहे, बधाई के नाम पर हो या नाल (कॉर्ड) कटाई के नाम पर. रजिस्टर में नाम दर्ज करना हो या प्रसूता को टांका (स्टीच) लगाना हो. परिजनों से हजार में ही मांग होती हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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