मनुआपुल तमकुहीराज फोरलेन की राह में अटका भू-अर्जन
Published by : RANJEET THAKUR Updated At : 02 Jan 2026 8:53 PM
बिहार और उत्तरप्रदेश को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित मनुआपुल(बेतिया) तमकुहीराज फोरलेन सड़क परियोजना के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
बेतिया . बिहार और उत्तरप्रदेश को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित मनुआपुल(बेतिया) तमकुहीराज फोरलेन सड़क परियोजना के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. पश्चिम चंपारण जिले के विभिन्न अंचलों में रैयतों की जमीन चिन्हित कर उन्हें नोटिस भी जारी कर दी गई है. रैयतों से संबंधित अंचलाधिकारी कार्यालय में जमीन से जुड़े आवश्यक कागजात जमा कराने को कहा गया है. साथ ही सभी अंचलाधिकारियों को वास्तविक भूस्वामियों को एलपीसी (भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र) निर्गत करने का निर्देश दिया गया है. हालांकि, प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद भू-अर्जन कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है. जानकारी के अनुसार जिन 1500 रैयतों को नोटिस तामिला कराई गई थी, उनमें से अब तक आधा दर्जन लोगों ने ही मुआवजे के लिए आवश्यक कागजात संबंधित अंचल कार्यालय में जमा कराए हैं. नोटिस मिलने के चार से पांच महीने बीत जाने के बाद भी अधिकांश रैयतों द्वारा कागजात जमा नहीं किए जाने से भू-अर्जन की प्रक्रिया अंतिम चरण तक नहीं पहुंच सकी है. यह स्थिति तब है जब इस महत्वाकांक्षी सड़क और पुल परियोजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से राशि स्वीकृत की जा चुकी है. जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 727 एए के निर्माण के तहत ठकराहां, बैरिया, योगापट्टी और चनपटिया प्रखंडों के नौ मौजों में भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है. कुल 1665 रैयतों से 174.28 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है. इनमें से लगभग 1500 भूधारकों ने नोटिस प्राप्त कर लिया है, लेकिन अधिकांश ने अब तक मुआवजे से संबंधित कागजात जमा नहीं किए हैं. इस परियोजना की खास बात यह है कि इसके अंतर्गत गंडक नदी पर देश का सबसे लंबा पुल भी प्रस्तावित है. सड़क के निर्माण के बाद बिहार से उत्तरप्रदेश के सेवरही तमकुहीराज की दूरी करीब 160 किलोमीटर से घटकर मात्र 27 किलोमीटर रह जाएगी. इससे न सिर्फ आवागमन सुगम होगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलेगी. प्रशासन की ओर से रैयतों से अपील की जा रही है कि वे समय रहते अपने कागजात संबंधित अंचल कार्यालय में जमा कराएं, ताकि भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी कर परियोजना को धरातल पर उतारा जा सके.
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