बेतिया: गन्ने पर मंडरा रहा नया खतरा! ‘अमेरिकन सुंडी’ ने बढ़ाई किसानों की चिंता
Published by : Sarfaraz Ahmad Updated At : 31 May 2026 6:05 PM
फॉल आर्मी वॉर्म की पहचान करते कृषि विशेषज्ञ
गन्ने की फसल पर अमेरिकन सुंडी का खतरा बढ़ गया है. किसानों को समय रहते सतर्क रहने और बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है. पढ़ें पूरी खबर..
बेतिया के नरकटियागंज से सतीश कुमार पांडेय
Bettiah News: जिले में लहलहा रही गन्ने की फसलों पर एक नया संकट मंडराने लगा है. फॉल आर्मी वॉर्म (स्पोडोप्टेरा फ्रूजीपर्डा), जिसे आम बोलचाल में ‘अमेरिकन सुंडी’ कहा जाता है, अब मक्का के बाद गन्ने की फसलों पर भी हमला करने लगा है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह खतरनाक कीट 80 से अधिक फसलों को नुकसान पहुंचाने में सक्षम है. ऐसे में गन्ना किसानों की चिंता बढ़ गई है.
गन्ना उत्पादक किसानों के लिए बढ़ा खतरा
अमेरिका मूल का यह कीट वर्ष 2018 में भारत में बड़े पैमाने पर देखा गया था. शुरुआत में इसका प्रकोप दक्षिण भारत तक सीमित था, लेकिन अब यह कई राज्यों में फैल चुका है. विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है.
नरकटियागंज चीनी मिल ने किसानों को अलर्ट करते हुए विशेषज्ञों की टीम को खेतों में उतार दिया है. टीम किसानों को कीट की पहचान और नियंत्रण के उपायों की जानकारी दे रही है.
चीनी मिल प्रबंधन ने किसानों को किया सतर्क
नरकटियागंज चीनी मिल के कार्यपालक अध्यक्ष रविंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि इस समय गन्ने की फसल को अमेरिकन सुंडी से बचाना सबसे बड़ी चुनौती है. यह अत्यंत विनाशकारी कीट है और कुछ ही दिनों में फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है.
उन्होंने कहा कि मिल प्रबंधन की टीम लगातार किसानों के बीच जाकर जागरूकता अभियान चला रही है. कीट से लड़ाई केवल दवा के भरोसे नहीं, बल्कि समय पर निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन से जीती जा सकती है.
ऐसे करें अमेरिकन सुंडी की पहचान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फॉल आर्मी वॉर्म के हमले के प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं—
- पत्तियों में अनियमित छेद दिखाई देना
- पत्तियों पर पारदर्शी ‘विंडो पेन’ जैसे धब्बे बनना
- पत्तियों का कंकाल जैसा दिखना
- नई पत्तियों का कटा-फटा निकलना
- पौधे के बीच वाले हिस्से (व्हॉर्ल) में भूरे रंग की बीट का जमा होना
- पौधों की बढ़वार रुक जाना
विशेषज्ञों का कहना है कि कई किसान इसे सामान्य इल्ली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह तेजी से पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकता है.
उत्पादन और चीनी रिकवरी पर पड़ सकता है असर
इस कीट के हमले से पौधों की शुरुआती वृद्धि प्रभावित होती है. टिलरिंग कम हो जाती है और प्रकाश संश्लेषण की क्षमता घट जाती है. इससे गन्ने की मोटाई और वजन कम हो सकता है. इसका सीधा असर उत्पादन और चीनी रिकवरी पर पड़ने की आशंका रहती है.
बचाव के लिए अपनाएं आईपीएम तकनीक
विशेषज्ञों ने किसानों को इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट (आईपीएम) तकनीक अपनाने की सलाह दी है.
नियमित निगरानी जरूरी
सप्ताह में कम से कम दो बार खेत का निरीक्षण करें और नई पत्तियों तथा पौधों के बीच वाले हिस्से की जांच करें.
खेतों की सफाई रखें
खरपतवार और मेड़ों पर उगी घास को हटाएं. संक्रमित पौधों को तुरंत नष्ट कर दें ताकि कीट का फैलाव रोका जा सके.
फेरोमोन ट्रैप का करें उपयोग
प्रति एकड़ 5 से 8 फेरोमोन ट्रैप लगाने से कीट की निगरानी और नियंत्रण में मदद मिलती है. जैविक नियंत्रण उपाय भी प्रभावी साबित हो सकते हैं.
किसानों से सतर्क रहने की अपील
कृषि विशेषज्ञों और चीनी मिल प्रबंधन ने किसानों से अपील की है कि फसल की नियमित निगरानी करें और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत कृषि विशेषज्ञों से संपर्क करें. समय पर की गई कार्रवाई ही फसल को बड़े नुकसान से बचा सकती है.
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लेखक के बारे में
By Sarfaraz Ahmad
सरफराज अहमद IIMC से प्रशिक्षित पत्रकार हैं. राजनीति, समाज और हाइपरलोकल मुद्दों पर लिखते हैं. क्रिकेट और सिनेमा में गहरी रुचि रखते हैं. बीते तीन वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत हैं।
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