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डीएम ने मुंगेर गंगा ब्रिज व उसके पास स्थित हीरा टोल जीरोमाइल का किया निरीक्षण

Updated at : 23 Nov 2024 9:02 PM (IST)
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डीएम ने मुंगेर गंगा ब्रिज व उसके पास स्थित हीरा टोल जीरोमाइल का किया निरीक्षण

डीएम तुषार सिंगला ने मुंगेर गंगा ब्रिज एवं उसके पास स्थित हीरा टोल जीरोमाइल का निरीक्षण किया.

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बेगूसराय

. डीएम तुषार सिंगला ने मुंगेर गंगा ब्रिज एवं उसके पास स्थित हीरा टोल जीरोमाइल का निरीक्षण किया. निरीक्षण के क्रम में उन्होंने पाया कि खगड़िया जाने वाली एनएच-31 के रास्ते मुंगेर जाने वाली वाहन एवं मुंगेर से खगड़िया जाने वाली वाहन यूटर्न से ना मुड़कर गलत साइड से होकर जाती है. साथ ही उक्त दोनों तरफ से आवागमन करने वाली बड़ी वाहन निर्धारित स्थल से ना मुड़कर गलत साइड से मुरती है. जिसके कारण दुर्घटना की संभावना बनी रहती है. इस समस्या के निराकरण के लिए सभी वाहनों की सुरक्षित आवागमन के लिये हीराटोल जीरोमाइल शाहपुर कमाल के समीप गोलंबर निर्माण करवाने का निर्देश डीएम ने दिया. साथ ही कहा कि हीराटोल जीरोमाइल साहेबपुरकमाल से मुंगेर जाने वाली पहुंच पथ का चौड़ीकरण करते हुए डिवाइड बनाया जायेगा.

बेगूसराय.

आयुर्वेद के माध्यम से गंभीर से गंभीर रोगों की भी चिकित्सा की जा सकती है.उक्त बातें राजकीय अयोध्या शिव कुमारी आयुर्वेद महाविद्यालय सह चिकित्सालय द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन संबोधन में जिलाधिकारी तुषार सिंगला ने कही. जिलाधिकारी श्री सिंगला आज कैप्शन होटल में आयोजित आयुर्वेद महाविद्यालय के एक दिवसीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे. सेमिनार का विषय था होलिया स्टिक अप्रोच इन आयुर्वेद इन प्रेजेंट एरा. जिलाधिकारी श्री सिंगला ने आयुर्वेद के महर्षि सुश्रुत की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न रोगों का पूरा वर्णन आयुर्वेद के शास्त्रों में किया है. आयुर्वेद के भविष्य को उज्जवल बताते हुए श्री सिंगला ने कहा कि आयुर्वेद के चिकित्सकों का एक बड़ा दायित्व है कि वह समाज पर अपनी छाप छोड़ें. उन्होंने वर्तमान जीवन को दुषित आहार विहारों से बचने का अनुरोध करते हुए कहा कि आयुर्वेद चिकित्सकों पर समाज को सुधारने का एक बड़ा दायित्व है. विभिन्न रोगों में आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी सिद्ध की औषधियां बहुत ही कारगर एवं प्रभावी हैं.

सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए डॉक्टर श्रीनिवास त्रिपाठी प्राचार्य ने कहा कि जन-जीवन में आयुर्वेद की बहुत ही महत्व है. इस अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार को भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद की इथिक बोर्ड की सदस्य प्रोफेसर डॉ रजनी ए नायर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के क्रिया शरीर के प्राध्यापक डॉक्टर प्रोफेसर किशोर पटवर्धन एवं रचना शरीर विभाग के प्रोफेसर डॉ एचएच अवस्थी ने भी समारोह को संबोधित किया. डॉ अवस्थी ने मानव शरीर के नाड़ी ईड़ा, पीड़ा सुसुम्ना की विशद व्याख्या करते हुए कहा कि यदि इन नाडियों को योग और आसन के माध्यम से जागृत किया जाए तो सभी तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है डॉक्टर पटवर्धन ने शरीर रचना के सिद्धांत को प्रस्तुत करते हुए इंसुलिन की उत्पत्ति और इंसुलिन के शरीर में विभिन्न प्रभावों की विशद व्याख्या की. इस अवसर पर मंच का संचालन डॉ राजीव कुमार शर्मा एवं डॉ रामनंदन साहनी कर रहे थे. डॉ जीपी शुक्ला ,डॉक्टर लाल कौशल कुमार, डॉ विजेंद्र कुमार, डॉ मुन्ना कुमार डॉक्टर सत्येंद्र कुमार सिंह आदि ने समारोह के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाया.

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