बखरी में अतिक्रमण की मार से सिकुड़ रही छोटी बागमती, नदी की जमीन पर बने मकान, अस्तित्व पर मंडराया संकट

Author Vikas Jha
Updated:
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बढ़ते अतिक्रमण से सिमटती जा रही बागमती नदी

बढ़ते अतिक्रमण से सिमटती जा रही बागमती नदी

Begusarai News: बेगूसराय के बखरी अनुमंडल क्षेत्र में छोटी बागमती नदी लगातार अतिक्रमण का शिकार हो रही है. नदी की जमीन पर मकान निर्माण, गंदे पानी के बहाव और प्रशासनिक उदासीनता के कारण इसका अस्तित्व संकट में पड़ता जा रहा है.

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Begusarai News (विकाश मिश्रा): नदियों के किनारे लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण की वजह से इसका अस्तित्व मिटने के कगार पर पहुंच गया है. बेगूसराय जिले के बखरी अनुमंडल इलाके से गुजरने वाली छोटी बागमती नदी के दोनों किनारे नदियों का अतिक्रमण बदस्तूर जारी है. समय रहते अगर इसे नहीं रोका गया तो इससे केवल बाढ़ का ही खतरा नहीं बढ़ेगा, बल्कि पर्यावरण को भी जबरदस्त नुकसान होने वाला है. हालात ऐसे बदतर हो गए हैं कि कई पक्के मकान तक नदियों में पिलर खड़े कर बना दिए गए हैं. वहीं लोग अपने घरों के गंदे पानी और शौचालय की गंदगी को भी सीधे नदी में गिराने से तनिक भी परहेज नहीं कर रहे हैं. इतना कुछ होने के बाद भी इस गंभीर समस्या पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा रहा है.

जनप्रतिनिधियों ने जताई गहरी चिंता

स्थानीय जिला परिषद सदस्य घनश्याम राय, चकहमीद मुखिया गीता देवी, उपमुखिया हुसैन खलीफा, पूर्व मुखिया मो अब्दुल हलीम, अमरजीत कुमार, निलेश कुमार, संतोष सावन, संजीत कुमार महतो, पप्पू खलीफा, पंसस विद्यानंद ठाकुर, गढ़पुरा प्रखंड के मौजी हरी सिंह मुखिया दिलीप राम, सरपंच नागों राम, इमादपुर के अनुज कुमार, समाजसेवी संदीप कुमार आदि ने इस पर चिंता जताई है. उन्होंने बताया कि नेपाल से निकलकर बिहार के कई जिलों के रास्ते होते हुए दरभंगा के सुपौल व कुशेश्वरस्थान मध्य से होकर बहने वाली बागमती नदी की पुरानी धार बखरी में अतिक्रमण की शिकार बन गई है. हालत यह है कि अब इसके अस्तित्व पर पूरी तरह ग्रहण उत्पन्न हो गया है.

कई जिलों से जुड़ी है धार

यह समस्तीपुर जिला के बिथान, बेगूसराय जिला के बखरी अनुमंडल अंतर्गत गढ़पुरा, सोनमा, चकहमीद, शकरपुरा होते हुए खगड़िया के बहादुरपुर, छिलकौड़ी, जोगिया, सहसी के साथ संतोष गेट जाकर मिल जाती है. जो आगे चलकर कोसी नदी में समाहित हो जाती है. तत्पश्चात बदला घाट व धमारा स्टेशन के नजदीक से निकलकर डुमरी के रास्ते से नवगछिया व कुर्सेला के गंगा तथा कोसी के संगम में मिल जाती है. नेताओं ने बताया कि जहाँ नदी कई जगह काले पानी की वजह से प्रदूषित हो गई है, तो कई जगहों पर नदी केवल नाले में तब्दील होकर रह गई है. कई इलाकों में नदी का निशान तक नहीं दिखता है, तो कई इलाकों में नदी की धार को पूरी तरह अतिक्रमित कर लिया गया है. जिसके कारण लोगों द्वारा मौके का फायदा उठाकर मकान तो कहीं मेड़ बना दिया गया है.

भूकंप के बाद बदले थे हालात

बताते चलें कि यह पुरानी धार पूर्व में बागमती नदी के नाम से ही जानी जाती थी. बताया कि वर्ष 1934 के भीषण भूकंप में नदी की धार दो भागों में बंट गई थी. इसके मुख्य भाग को बागमती और सहयोगी भाग को छोटी बागमती व मनुषमारा का नाम मिला था. इधर, कुछ सालों पूर्व एक बार फिर से बागमती ने अपनी पुरानी धार बदली थी. लेकिन प्रचंड गर्मी, नियमित रूप से साफ-सफाई और सहयोग नहीं मिलने से नदी का पानी पुनः सूख गया. जिसके कारण कई जगहों पर स्थानीय लोगों ने मिट्टी काटकर मटखुनमा बना दिया. वहीं बरसात के दिनों में बागमती नदी की पुरानी धार में जलप्रवाह रहता है, जबकि शेष दिनों में यह धार पूरी तरह गुम हो जाती है.

सरकारी योजनाओं की खुली अवहेलना

सामाजिक व राजनैतिक कार्यकर्ता संजीत कुमार महतो बताते हैं कि कभी बागमती की पुरानी धार की धाराओं से हजारों हेक्टेयर खेत में सिंचाई होती थी. नदी के पानी से फसल लहलहाते थे, लेकिन आज यही नदी पूरी तरह उपेक्षित पड़ी है. उन्होंने बताया कि सरकार नदी से नदी जोड़ो, जल, जीवन और हरियाली जैसी महत्वाकांक्षी योजना चला रही है. इसके तहत नदी, तालाब, पोखर, नहर, कुंआ और पईन का जीर्णोद्धार कराने की योजना पर काम हो रहा है. लेकिन, बखरी अनुमंडल क्षेत्र में छोटी बागमती के पुरानी धार की धाराओं को पुनर्जीवित करने या अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में कोई पहल तक नहीं की जा रही है.

किसानों की सिंचाई समस्या बरकरार

उधर, स्थानीय किसानों का कहना है कि अगर पुरानी धार की धाराओं को पुनर्जीवित कर दिया जाता, तो किसानों की सिंचाई की समस्याओं के निदान से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती. किसानों ने बताया कि उचित संरक्षण और संवर्द्धन के घोर अभाव में नदी के अस्तित्व पर भारी ग्रहण उत्पन्न हो गया है. प्रशासन को इस दिशा में त्वरित संज्ञान लेते हुए पूरी नदी को भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों से मुक्त कराना चाहिए ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे.

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विकाश झा

लेखक के बारे में

By विकाश झा

विकाश झा प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में छह वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक तथा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है.

पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2020 में भोपाल से हुई, जिसके बाद उन्होंने ETV Bharat, Bharat Express और News24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में विभिन्न जिम्मेदार भूमिकाओं का निर्वहन किया. News24 से आगे बढ़ते हुए उन्होंने Adglobal360 India Pvt. Ltd. के माध्यम से बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) में कंटेंट राइटर के रूप में कार्य किया तथा बिहार सरकार के विभिन्न विभागों की सोशल मीडिया टीमों में भी अपनी सेवाएं दीं.

स्पोर्ट्स, हाइपरलोकल और पॉलिटिकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. क्रिकेट के प्रति उनका गहरा लगाव है और वे क्रिकेट को सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि अपनी लेखनी का महत्वपूर्ण विषय मानते हैं. उन्हें यात्रा करना, नए लोगों और स्थानों को जानना तथा समाज और राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है.

मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले विकाश डिजिटल मीडिया की तेज रफ्तार दुनिया में तथ्यों पर आधारित, प्रभावशाली और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करने के लिए जाने जाते हैं.

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