बेगूसराय: तेघड़ा बाल विकास परियोजना कार्यालय में अनियमितता के आरोप, स्थानीय लोगों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की

Author Niraj Kumar|Edited by Vikash Jha
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कार्यालय की स्थिति | Prabhat Khabar Network

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बेगूसराय के तेघड़ा प्रखंड मुख्यालय स्थित बाल विकास परियोजना (ICDS) कार्यालय में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं. निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी सेविकाओं को जमीन और सीढ़ियों पर बैठकर रजिस्टर भरने और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम पर फर्जी बिल तैयार करते पाया गया. स्थानीय लोगों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.

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Begusarai News: बेगूसराय जिले के तेघड़ा प्रखंड मुख्यालय स्थित बाल विकास परियोजना (ICDS) कार्यालय एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं और विवादों के घेरे में आ गया है. बुधवार को कार्यालय परिसर के निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी सेविकाएं ज़मीन और सीढ़ियों पर बैठकर रजिस्टर भरतीं और विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के नाम से बिल तैयार करती पाई गईं.

सीढ़ियों पर बैठकर सादे बिल और रजिस्टर भरती दिखीं सेविकाएं

निरीक्षण के दौरान सीडीपीओ मीरा कुमारी, पर्यवेक्षिकाएं और अन्य कर्मचारी कार्यालय में मौजूद थे. आरोप है कि कार्यालय कर्मियों की मिलीभगत और निर्देश पर ही आंगनबाड़ी सेविकाओं से सरकारी रजिस्टर और बिल तैयार करवाए जा रहे थे. पत्रकारों को देखते ही कुछ सेविकाएं रजिस्टर बंद कर भागने लगीं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभिन्न दुकानों के सादे बिलों पर मनमाने ढंग से राशि भरकर खर्च का ब्योरा तैयार किया जा रहा है.

फर्जी बिलिंग और बिचौलियों के दखल पर उठे सवाल

जांच के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-95 की सेविका नीलम कुमारी से जुड़े दस्तावेजों में 'ऋषभ मोबाइल, अजीत पत्रकार पथ, बरौनी चौक' के नाम का बिल दर्ज मिला. इससे यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि इतनी बड़ी संख्या में निजी दुकानों के सादे बिल कार्यालय तक कैसे पहुंचे. इसके अलावा स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सेविकाओं के स्थान पर उनके पति व परिजन कार्यालय में बैठकर सरकारी काम संभालते हैं और अवैध वसूली में संलिप्त रहते हैं.

पुराने वायरल वीडियो और जांच रिपोर्ट पर भी सवाल

उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी नया नगर दुलारपुर की एक बैठक से जुड़ा एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक पर्यवेक्षिका पर पोषाहार मद में कमीशन लेने के गंभीर आरोप लगे थे. तत्कालीन एसडीओ राकेश कुमार ने मामले की जांच का आदेश दिया था और जांच टीम भी गठित की गई थी. हालांकि, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से स्थानीय लोगों में असंतोष है. ग्रामीणों ने अब पूरे मामले की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.


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