दिनकर की कविता में अभिजन के प्रति विद्रोह : डॉ भगवान
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Sep 2019 6:30 AM
बीहट : दिनकर की कविता में अभिजन के प्रति विद्रोह है. संस्कृति के चार अध्याय में भारत के जिस संस्कृति की वकालत दिनकर करते हैं वह आज खतरे में है. उक्त बातें 111वीं दिनकर जयंती समारोह के चौथे दिन प्रोग्रेसिव सेंट्रल स्कूल सिमरिया में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व प्रसिद्ध आलोचक डॉ भगवान प्रसाद […]
बीहट : दिनकर की कविता में अभिजन के प्रति विद्रोह है. संस्कृति के चार अध्याय में भारत के जिस संस्कृति की वकालत दिनकर करते हैं वह आज खतरे में है. उक्त बातें 111वीं दिनकर जयंती समारोह के चौथे दिन प्रोग्रेसिव सेंट्रल स्कूल सिमरिया में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व प्रसिद्ध आलोचक डॉ भगवान प्रसाद सिन्हा ने कही. उन्होंने कहा अपनी कविताओं में मानव मूल्यों को गढ़ते दिनकर गंभीर दिखते हैं.समता मूलक समाज निर्माण ही दिनकर का वैचारिक पक्ष है.
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