शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा आज
Updated at : 17 Sep 2019 6:41 AM (IST)
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बेगूसराय : हर साल की तरह इस बार भी विश्व के आदि शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा पूजा का त्योहार 17 सितंबर दिन को मनाया जा रहा है. पूजा की तैयारी को लेकर शहर बाजारों में सजावट व पूजन सामग्री की स्थायी व अस्थायी दुकानें सज-धज गयी है. हर साल विश्वकर्मा पूजा के पूर्व संध्या पर सजावट […]
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बेगूसराय : हर साल की तरह इस बार भी विश्व के आदि शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा पूजा का त्योहार 17 सितंबर दिन को मनाया जा रहा है. पूजा की तैयारी को लेकर शहर बाजारों में सजावट व पूजन सामग्री की स्थायी व अस्थायी दुकानें सज-धज गयी है. हर साल विश्वकर्मा पूजा के पूर्व संध्या पर सजावट सामग्रियों के छोटे-बड़े दुकानदार लाखो का कारोबार कर लेते थे. इस बार भी सोमवार की सुबह से ही व्यवसायी उत्साहित होकर अपने दुकानों पर जम गये.
पूजा के समानों की खरीदारी को लेकर बारिश होने के बाद भी चहल-पहल देखी गयी. एनएच 31 खातोपुर से लेकर जीरोमाइल के बीच में छोटे-बड़े कल कारखानों को बड़े ही आकर्षक तरीके से सजाया जा रहा है. कई जगहों पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया है.
नये मोटर वाहन कानून का व्यवसाय पर दिखा असर :ट्रैफिक चौक,मेन रोड व हर-हर महादेव चौक पर सजावट सामग्रियों का बड़ा बाजार लगता है. ट्रैफिक चौक के दुकानदारों ने बताया कि हर साल विश्वकर्मा पूजा के पूर्व संध्या पर अच्छा-खासा व्यवसाय हो जाता था.
परंतु इस बार 25 प्रतिशत व्यवसाय पर असर नये मोटर कानून का पड़ा. विश्वकर्मा पूजा काफी संख्या में वाहन चालक व मालिक द्वारा की जाती है. इस बार दर्जनों वाहन कागजातों के कमी के कारण लोग दरवाजे पर खड़े कर रखे है.वैसे वाहन चालक बेरोजगार है.
उनकी आमदनी का असर उनके द्वारा की जानी वाली पूजा पर पड़ रहा है.लोग सजावट का समान कम से कम लेना चाह रहे है.वहीं रही सही कसर अचानक होने वाली बारिश ने कर दिया. रुक-रुक कर वर्षा होने से भी ग्राहक बिखर गये. अब तो हम मंगलवार विश्वकर्मा पूजा के दिन पर ही भरोसा कर रहे है, जिससे इस बार लगायी गयी पूंजी भी कम से कम वापस आ जाये.
किस तरह से भगवान विश्वकर्मा की होती है पूजा :श्रद्धालु स्नानादि करने के बाद अच्छे कपड़े पहनकर भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठते हैं.भगवान विश्वकर्मा की पूजा आरती करने के बाद पूजा सामग्री जैसे-अक्षत,हल्दी,फूल, पान,लौंग,सुपारी, मिठाई,फल,धूप दीप और रक्षासूत्र आदि से विधिवत पूजा आरंभ होती है.
भगवान विश्वकर्मा की पूजा के बाद सभी औजारों व मशीनरी वस्तुओं पर हल्दी चावल लगाया जाता है. इसके बाद कलश को हल्दी चावल व रक्षासूत्र चढ़ाया जाता है. इसके बाद पूजा मंत्रों का उच्चारण होता है. पूजा संपन्न होने के बाद कार्यालय के सभी कर्मचारियों या पड़ोस के लोगों को प्रसाद वितरण करते हैं.
विश्वकर्मा पूजा का क्या है महत्व :
मान्यता है कि हर साल मशीनों और औजारों की पूजा करने से वे जल्दी खराब नहीं होते.मशीनें अच्छा चलती हैं क्योंकि भगवान विश्वकर्मा की कृपा उन पर बनी रहती है.यूपी, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, पश्चिम बंगाल में प्रमुख रूप से विश्वकर्मा पूजा की जाती है.
पूजा के संबंध में क्या है मान्यता
मान्यता है कि आज के दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था. कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही देवताओं के लिए अस्त्रों, शस्त्रों, भवनों और मंदिरों का निर्माण किया था.उन्होंने सृष्टि की रचना में भगवान ब्रह्मा की सहायता इसके बाद उन्हें दुनिया का पहला शिल्पकार माना जाता है. शिल्पकार खासकर इंजीनियरिंग काम में लगे लोग उन्हें अपना आराध्य मानते हैं और उनकी पूजा करते हैं.
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