स्वच्छता व पवित्रता का संगम है श्रावणी मेला

Published at :06 Aug 2016 8:46 AM (IST)
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स्वच्छता व पवित्रता का संगम है श्रावणी मेला

एक सौ पांच किलोमीटर लंबी दूरी (सुल्तानगंज से बाबाधाम) व एक माह तक चलने वाला मेला पूरी दुनिया में नहीं है. इस मेला में दुनिया के विभिन्न देशों व प्रांतों के शिवभक्त कांवर यात्रा करते हैं. जिस कारण इसे विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला कहा जाता है. कटोरिया : श्रावणी मेला अपने-आप में इस मामले में […]

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एक सौ पांच किलोमीटर लंबी दूरी (सुल्तानगंज से बाबाधाम) व एक माह तक चलने वाला मेला पूरी दुनिया में नहीं है. इस मेला में दुनिया के विभिन्न देशों व प्रांतों के शिवभक्त कांवर यात्रा करते हैं. जिस कारण इसे विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला कहा जाता है.
कटोरिया : श्रावणी मेला अपने-आप में इस मामले में भी अनोखा है कि रिकॉर्ड लंबाई के साथ-साथ संपूर्ण पथ में पवित्र गंगाजल छिड़का हुआ है. सुल्तानगंज से बाबाधाम की संकल्प यात्रा शुरू करने से पूर्व सभी श्रद्धालु अपने कांवर में गंगाजल का दो गागर रखने के साथ ही साथ एक छोटा डब्बा में भी गंगाजल भर कर टांग कर रखते हैं. जिसे शुद्धि जल कहा जाता है. कांवर यात्रा के दौरान जब कभी भी रात्रि विश्राम या अल्प विश्राम किया जाता है या फिर मल-मूत्र का त्याग ही किया जाता है.
उसके बाद स्टैंड से कांवर उठाने से पहले अपने शरीर पर शुद्धि जल छिड़ कर खुद को कांवर उठाने योग्य पवित्र किया जाता है. सुल्तानगंज से बाबाधाम के पग-पग में कांवरिया बंधुओं का ठहराव होता है. प्रत्येक दिन औसतन अस्सी हजार से एक लाख की संख्या में श्रद्धालु कांवर यात्रा करते हैं. इस कारण यात्रा के दौरान इतनी संख्या में शिवभक्तों द्वारा शुद्धि जल छिड़कने से कांवरिया पथ का कण-कण पवित्र हो जाता है.
समूचे कांवरिया पथ को अपने शरीर से नापने का संकल्प लेने वाले दंडी बम तो इस पवित्र धरती पर लेटते हुए बाबाधाम की ओर अग्रसर होते हैं. कांवरिया पथ से होकर गुजरने वाले कांवरिया हों या फिर स्थानीय लोग या दुकानदार सभी इस रास्ते की पवित्रता को बरकरार रखने का भरपूर प्रयास करते हैं. जाने या अनजाने में गल्ती होने पर अपना कान पकड़ कर भोलेनाथ से माफी भी मांगी जाती है.
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