यहां पानी के लिए बहता है खून

Published at :28 Jul 2016 6:30 AM (IST)
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यहां पानी के लिए बहता है खून

विडंबना . कटोरिया प्रखंड के मनिया पंचायत का वाकया कहते हैं कि जल ही जीवन है. उस जल के लिए लोग दर-दर की ठोकर खायें तो हम यहीं कहेंगे की 21 वीं सदी में रहना बेकार है. हमने विकास की कई परिभाषाएं दी हैं, लेकिन अगर एक बूंद पानी के लिए लोग खून की नदी […]

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विडंबना . कटोरिया प्रखंड के मनिया पंचायत का वाकया

कहते हैं कि जल ही जीवन है. उस जल के लिए लोग दर-दर की ठोकर खायें तो हम यहीं कहेंगे की 21 वीं सदी में रहना बेकार है. हमने विकास की कई परिभाषाएं दी हैं, लेकिन अगर एक बूंद पानी के लिए लोग खून की नदी बहा दे तो यह चिंता का विषय है. जहां एक ओर शुद्ध पेयजल के लिए सरकार करोड़ों की राशि खर्च कर रही है, वहीं इस जिले के एक पंचायत में पानी के लिए मारामारी होती है. चापाकल को घेर कर ताला लगा कर रखा जाता है.
बांका: सुशासन सरकार ने विकास के लाखों दावे किये हैं, लेकिन अगर उस विकास की परिभाषा यह हो कि एक बूंद पानी के लिए लोग लहू की होली खेले तो बेकार है. बात कटोरिया प्रखंड के मनिया पंचायत की है जहां एक बूंद पानी के लिए मार-पीट और खून खराबा हो जाता है. उस पंचायत के बुटबरिया और तिलवारी गांव में एक बूंद पानी के लिए मारा मारी होती है. यहां पर सरकारी चापाकल के नाम पर सिर्फ तीन चापाकल है. जिसमें से एक-एक चापाकल गांव के विद्यालय में और एक चापाकल ठाकुर टोला में है. यहां पानी पीने के लिए 2000 रुपये तक खर्च किये जाते हैं.
दोनों गांव को मिलाकर करीब 150 घर है. यानी कहे तो करीब 750 लोग इस गांव में बसते है. सरकारी योजना के तहत दोनों गांवों को मिला कर तीन चापाकल है. यहां पर पानी पीने के लिए लोगों को काफी मशक्कत उठानी पड़ती है. दोनों गांवों में सिर्फ खाना और पीने के लिए चापाकल का पानी मिलता है. शेष कामों के लिए लोगों को पास के जोर नदी का सहारा लेना होता है. जिस कारण लोग अपने अपने चापाकल में ताला लगा कर रखते है. हालांकि कि अब ग्रामीणों को यह समझ आ गयी है कि अगर पानी की बरबादी की जायेगी तो पीने के पानी की संकट आ सकती है इस लिए अब आपस में खूनी विवाद कम हो गया है.
बांस की चहारदीवारी में ताले में कैद चापाकल
2000 रुपये तक का करना पड़ता है भुगतान
गांव में हो रहे विकास कार्य के लिए पहुंचे संवेदक व कर्मी ने बताया कि इस गांव में पीने के पानी के लिए दर व दर की ठोकर खानी पड़ती है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर चापाकल से पानी पीना है तो उसको 2000 रुपया देना होगा.
सरकार के शुद्ध पेयजल देने के दावे फेल, लोगों को रही भारी परेशानी
क्या कहते हैं अधिकारी
इस तरह के मामले का कोई लिखित शिकायत नहीं है. फिर अब जब मामले की जानकारी मिली है तो गंभीरता से इस पर संज्ञान लिया जायेगा. इसके बाद मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जायेगी
कटोरिया, बीडीओ
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