किसानों के खेत तक नहीं पहुंच रहा है नहर का पानी

Published at :20 Jun 2016 7:50 AM (IST)
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किसानों के खेत तक नहीं पहुंच रहा है नहर का पानी

करोड़ों रुपये खर्च. कई जगहों पर टूट गयी है नहर किसान मॉनसून की आस में हैं. उन्हें अपने खेतों में पानी के लिए तरसना पड़ रहा है. सबको पंपसेट मयस्सर नहीं है. ऐसे में नहरों से मिलने वाला पानी भी नहीं मिलने से अन्नदाता परेशान हैं. जबकि इसके लिए योजनाएं बनती रहती हैं. लेकिन मुकम्मल […]

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करोड़ों रुपये खर्च. कई जगहों पर टूट गयी है नहर
किसान मॉनसून की आस में हैं. उन्हें अपने खेतों में पानी के लिए तरसना पड़ रहा है. सबको पंपसेट मयस्सर नहीं है. ऐसे में नहरों से मिलने वाला पानी भी नहीं मिलने से अन्नदाता परेशान हैं. जबकि इसके लिए योजनाएं बनती रहती हैं. लेकिन मुकम्मल काम नहीं किया जाता.
बांका : सरकार भले ही किसानों को आत्मनिर्भर करने के लिए प्रतिदिन तरह- तरह की योजना पर काम कर रही है. लेकिन क्षेत्र के किसानों को इसका लाभ कितना मिल रहा है ये आप भी अंदाजा लगा सकते हैं. किसानों के खेत तक पानी पहुंचाने के लिए सरकार द्वारा डैम के साथ-साथ नहर का निर्माण कराया गया है. ताकि किसानों के खेतों तक पानी पहुंच सकें.
लेकिन नहरी क्षेत्र होने के बाद भी उस क्षेत्र के किसानों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है. जबकि पिछले साल ही खिड्डी मैन ब्रांच नहर तेलिया गांव के समीप बिशनपुर, रीगा, हरिपुर गांव सहित कई जगह पर टूटी है. जिसकी आज तक मरम्मती नहीं हो सकी है. इससे किसानों के खेतों तक पानी पहुंचने से पहले ही बर्बाद हो जाता है. वहीं बड़ी नहर की भी यही दशा है .
शहर के पास के शंकरपुर नहर की स्थिति भी ठीक नहीं है.
बढ़ रही फसल की चिंता: किसान अपने मुख्य फसल धान की बुआई के लिए दिन भर अपने खेतों में मेहनत कर रहे हैं कि बीज बुआई का समय निकल ना जाये. किसानों की माने तो धान बीज की बुआई के लिए मुख्य नक्षत्र आ गया है. इस नक्षत्र में अधिकांश किसान बीज की बुआई कर लेते हैं ताकि समय पर उनकी धान तैयार हो सके. लेकिन टूटे नहर को देख किसानों की चिंता बढ़ गयी है.
हुई निकासी, टूटी रह गयी नहर
1995 में आयी बाढ़ के बाद क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत आज तक सही से नहीं हो पाया है. भले ही इसकी मरम्मती के नाम पर करोडों रुपये निकासी हो गयी हो लेकिन विकास के नाम में शून्य है. आज भी अगर लक्ष्मीपुर डैम से नहर में पानी छोड़ा जाये तो किसानों के खेत तक पानी नहीं पहुंच सकेंगा. कई जगह नहर टूटी है. विभाग के अधिकारी ना तो टूटे बांध को देखने जाते हैं, ना ही किसानों की सुधि लेते हैं.
25 को अायेगा पानी : जेइ
सिंचाई विभाग के जेइ मुकेश कुमार ने कहा कि 25 जून से डैम का द्वार नहर के लिए खोल दिया जायेगा. इसके पूर्व क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत कर ली जायेगी.
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