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मौसम का प्रभाव, सूख गयी लालमी की फसल

Updated at : 23 Apr 2025 5:34 PM (IST)
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मौसम का प्रभाव, सूख गयी लालमी की फसल

किसान चिंतित, जनवरी में की थी बुवाई

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किसान चिंतित, जनवरी में की थी बुवाई

प्रतिनिधि, अंबा अप्रैल में तापमान बढ़ाने से जनजीवन काफी प्रभावित हो गया है. गर्मा फसल बचाने में किसानों को काफी परेशानी हो रही है. सिंचाई के अभाव में कई तरह के फसल सूखने लगे हैं. चिल्हकी बिगहा गांव के बधार में लगा लालमी का फसल सूखकर पूरी तरह नष्ट हो गया है. ऐसे में किसान गंभीर रूप से परेशान हैं. उक्त गांव के किसान वीरेंद्र मेहता, जय मंगल मेहता, जनेश्वर मेहता, मुकेश समेत दर्जनों किसान लालमी का फसल लगाये थे. जनवरी माह के अंत में फसल लगाया गया था. पौधा का ग्रोथ काफी बेहतर था. किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष बेहतर उत्पादन होने से अच्छी आमदनी हुई थी. इस वर्ष भी फसल का ग्रोथ बेहतर था. ऐसा लग रहा था कि आमदनी अच्छी होगी. अप्रैल माह में फल लगना शुरू हुआ कि एकाएक तापमान बढ़ने से पौधा सूखने लगा. ऐसे में किसान काफी चिंतित है. किसानों के अनुसार एक एकड़ में लालमी के फसल लगाने में तकरीबन 20000 रुपया खर्च हुआ था. फल लगने पर प्रति एकड़ एक लाख रुपये से अधिक आमदनी होने का उम्मीद था. परंतु फसल सूखने से किसानों की उम्मीद पर पानी फिर गया है. हालांकि जिन किसानों ने दिसंबर माह के अंतिम एवं जनवरी माह के पहले सप्ताह में बुआई किया था उनका फसल आज भी काफी बेहतर है. ऐसे किसानों को अच्छी आमदनी होने की उम्मीद है.

मई महीने में तैयार हो जाता है फल

कृषि विशेषज्ञों के माने तो लालमी के बुआई का समय जनवरी एवं फरवरी माह उपयुक्त माना जाता है. जनवरी में बीज लगाने से अप्रैल तक फल देने लगता है. वही मई महीने के पहले सप्ताह तक फल पक कर तैयार हो जाता है. इस बीच तैयार फल को थोड़े समय के अंतराल पर तोड़ कर बाजार में बिक्री की जाती है.

तापमान अधिक बढ़ने से सहन नहीं कर पाते हैं छोटे पौधे

कृषि मौसम वैज्ञानिक डॉक्टर अनूप कुमार चौबे ने बताया कि मौसम का तापमान एकाएक बढ जाने से छोटे पौधे सहन नहीं कर पाते हैं. इस वर्ष गर्मी काफी होने से फसल सूखने लगा है. उन्होंने बताया कि किसी भी फसल को लगाते समय स्थान के अनुसार उसके प्रजाति का चुनाव किया जाना जरूरी है. बाजार में दूसरे स्थान बीज आ जाने से यहां का मौसम सहन नहीं कर पाता है, ऐसे में भी पौधा सूख सकता है, जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है तथा उनकी परेशानी बढ़ जाती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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