ज्ञान भारतम् मिशन: औरंगाबाद में 26 हजार से अधिक प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान, 15 जून तक सर्वेक्षण

Published by : Vivek Pandey Updated At : 11 Jun 2026 7:03 AM

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Aurangabad News:ज्ञान भारतम् मिशन के तहत औरंगाबाद में 26,158 से अधिक प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपियों की पहचान की गई है। 75 वर्ष से अधिक पुराने दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन और संरक्षण का कार्य तेज, जिला प्रशासन ने नागरिकों से सहयोग की अपील की है.

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Aurangabad News: (सुजीत कुमार सिंह) ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत औरंगाबाद जिले में प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटाइजेशन का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है. जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा, जिला पंचायती राज पदाधिकारी इफ्तिखार अहमद तथा जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी कुमार पप्पू राज लगातार इस अभियान की निगरानी कर रहे हैं.

26,158 हस्तलिखित दस्तावेजों की हो चुकी है पहचान

मिशन के तहत जिले में अब तक लगभग 26,158 हस्तलिखित दस्तावेजों की पहचान की जा चुकी है.इस उपलब्धि के साथ औरंगाबाद राज्यस्तरीय सर्वेक्षण में छठे स्थान पर पहुंच गया है. अधिकारियों के अनुसार सर्वेक्षण के बाद विशेषज्ञों की टीम संबंधित स्थलों का भौतिक सत्यापन करेगी और संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाएगी.

कई पारंपरिक माध्यमों की पांडुलिपियां हो रही हैं शामिल

इस अभियान के तहत 75 वर्ष या उससे अधिक पुराने हस्तलिखित दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन किया जा रहा है. इनमें कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़ा, धातु तथा अन्य पारंपरिक माध्यमों पर लिखी गई पांडुलिपियां शामिल हैं. उद्देश्य भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, ऐतिहासिक दस्तावेजों और दुर्लभ ग्रंथों को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है.

मुख्य सचिव ने दिए त्रुटिरहित सर्वेक्षण के निर्देश

समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि सर्वेक्षण पूरी तरह तथ्यपरक और त्रुटिरहित हो, ताकि किसी प्रकार की आपत्ति या अस्वीकृति की स्थिति उत्पन्न न हो. उन्होंने निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से कार्य पूरा करने पर जोर दिया. सर्वेक्षण कार्य 15 जून 2026 तक पूरा किया जाना प्रस्तावित है.

जिलेवासियों से सहयोग की अपील

जिला प्रशासन ने अपील की है कि जिन नागरिकों के पास 75 वर्ष या उससे अधिक पुराने हस्तलिखित दस्तावेज सुरक्षित हैं, वे उनके डिजिटाइजेशन के लिए जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी कुमार पप्पू राज से संपर्क करें. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पांडुलिपियों का स्वामित्व संबंधित व्यक्ति या संस्था के पास ही रहेगा और डिजिटाइजेशन के माध्यम से देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किया जाएगा.

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लेखक के बारे में

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विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने ​बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. ​बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. ​जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.

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