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Aurangabad News : इतिहास व संस्कृति से अलग हटते जा रहे : प्रकाश

Updated at : 29 Dec 2024 10:22 PM (IST)
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Aurangabad News : इतिहास व संस्कृति से अलग हटते जा रहे : प्रकाश

Aurangabad News :नगर भवन में समकालीन जवाबदेही पत्रिका का किया गया लोकार्पण

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औरंगाबाद कार्यालय.

नगर भवन में भव्य कार्यक्रम आयोजित कर समकालीन जवाबदेही पत्रिका के संस्मरण अंक 2024 का लोकार्पण किया गया. बीएचयू वाराणसी के प्राचार्य प्रोफेसर प्रकाश शुक्ल, मगध विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव नलिन के शास्त्री, पुलिस उपाधीक्षक संजय कुमार पांडेय, सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज के प्राचार्य डॉ सुधीर कुमार मिश्र, प्रयागराज के यात्री कर अधिकारी रणवीर सिंह चौहान, हिंदी साहित्य भारती झारखंड के महामंत्री राकेश कुमार, चर्चित कवि शंकर कैमूरी, प्रयाग पथ के सम्पादक हितेश कुमार सिंह, रविशंकर सोनकर, नगर पर्षद के अध्यक्ष उदय गुप्ता, रेडक्रॉस के चेयरमैन सतीश कुमार सिंह, पत्रिका के अतिथि संपादक डॉ कुमार वीरेंद्र, डॉ सच्चिदानंद प्रेमी, डॉ विंध्याचल यादव, जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह, भारत अध्ययन केंद्र के डॉ अमित पांडेय, डॉ महेंद्र प्रसाद कुशवाहा, संगीता नाथ, प्रधान संपादक डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्रा संरक्षक शंभू नाथ पांडेय आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. आरएनपी ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन एवं कपिल देव संगीत महाविद्यालय के छात्राओं ने वेलकम साउंड से अतिथियों का स्वागत किया. इस क्रम में आयोजन समिति द्वारा भी अतिथियों को अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिह्न से सम्मानित किया गया. इसके साथ ही आगत अतिथियों ने संयुक्त रूप से पत्रिका का विमोचन किया. औरंगाबाद के साथ-साथ बिहार के विभिन्न क्षेत्रों व झारखंड, उत्तर प्रदेश व इलाहाबाद के भी अधिकारी व साहित्य प्रेमी पत्रिका भी मौसम के साक्षी बने. कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचदेव धाम चपरा के संस्थापक अशोक कुमार सिंह ने की व संचालन प्रेमेंद्र मिश्रा ने किया. स्वागत भाषण के दौरान प्रधान संपादक ने पत्रिका के प्रकाशन में लेखनी व अन्य सभी प्रकार के सहयोग पहुंचाने तथा विमोचन के क्रम में आये अतिथि एवं स्थानीय लोगों के प्रति आधार वक्तव्य किया. उन्होंने कहा कि संस्मरण स्मृति को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से समकालीन जवाबदेही के यह संस्मरण अंक प्रकाशित किया गया है. अतिथि संपादक डॉ कुमार वीरेंद्र ने पत्रिका के उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा किया. समकालीन जवाबदेही का संस्मरण अंक वर्तमान परिदृश्य के ज्वलंत मुद्दों के प्रति जागरूक है. उन्होंने पत्रिका के सभी उपखंडों के बारे में विस्तार से चर्चा किया.

वर्तमान परिवेश में साहित्य व संस्कृति से लोगों को जोड़कर रखना भागीरथी प्रयास

आगत अतिथियों ने समकालीन जवाबदेही पत्रिका को राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका बताते हुए कहा कि औरंगाबाद के लोगों का यह भगीरथ प्रयास है. मुख्य वक्ता प्रोफेसर शुक्ल ने कहा कि यह दौर जब युवा इतिहास व संस्कृति से अलग हटते जा रहे हैं. ऐसे दौर में युवा को साहित्य, संस्कृति व इतिहास से जोड़ने का प्रयास किया गया है जो सराहनीय कदम है. इस पत्रिका में स्थानीयता के सार्वजनिक सरोकारों की पहचान की गयी है. पूर्व कुल सचिव श्री शास्त्री ने कहा कि साहित्य में संस्मरण विद्या सबसे खुली विद्या है. यह विद्या देखने सुनने में आसान है, परंतु अपने संस्मरण को संजोग कर लेखनी में उतरना हकीकत में चुनौती है. यह कर औरंगाबाद के साहित्यकार के द्वारा बखूबी से किया गया है. एसडीपीओ श्री पांडेय ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है. साहित्य के अध्ययन के बगैर किसी भी क्षेत्र में कामयाबी हासिल करना संभव नहीं दिखता है. झारखंड विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने दूरभाष के माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए कहा कि समकालीन जवाबदेही का संस्मरण अंक औरंगाबाद के लोगों को प्रेरणा देता रहेगा.

पत्रिका निकालना ठंड में टी-शर्ट पहन कर बाहर घूमने जैसा दुर्लभ कार्य

कार्यक्रम को सुधीर कुमार मिश्रा, हितेश कुमार सिंह, रविशंकर सोनकर, विंध्याचल यादव, महेंद्र प्रसाद कुशवाहा, अमित पांडेय आदि नेवी संबोधित किया. वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जब युवा साहित्य एवं इतिहास से दूरी बना रहे हो ऐसे समय में पत्रिका निकालना ठंड में टी-शर्ट पहनकर बाहर घूमने जैसा दुर्लभ कार्य है. यह संस्मरण अंक इतिहास व संस्कृति की सेतु है. कहा कि साहित्य की गहराई में जो डुबकी लगातें है वहीं रत्न ढूंढ लाते हैं. मौके पर विधायक प्रतिनिधि प्रदीप कुमार सिंह, सिद्धेश्वर विद्यार्थी, अधिवक्ता रविंद्र तिवारी, मीडिया प्रभारी सुरेश विद्यार्थी, डॉ रामाधार सिंह, चंदन कुमार, पुरुषोत्तम पाठक, उज्ज्वल रंजन अवनीश यादव, डॉ शिवपूजन सिंह, भैरवनाथ पाठक, शिवनारायण सिंह, अवध किशोर मिश्र, राजमणिजी, हेमप्रकाश, अनिल प्रकाश, समीक्षा शिवांगी, सुशील पांडेय, अशोक पांडेय आदि थे.

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