लोकसभा में उठा औरंगाबाद बिहटा रेललाइन का मुद्दा

Published at :03 Mar 2016 8:11 AM (IST)
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लोकसभा में उठा औरंगाबाद बिहटा रेललाइन का मुद्दा

सांसद ने कहा, जिस आबादी से यह रेललाइन गुजरेगी, वहां से 50-50 किलोमीटर की दूरी तक रेल सेवा नहीं है औरंगाबाद कार्यालय : करीब 122 किलोमीटर लंबी बिहटा-औरंगाबाद रेललाइन परियोजना की मांग काफी दिनों बाद लोकसभा में उठा है. औरंगाबाद सांसद सुशील कुमार सिंह द्वारा यह मांग उठाये जाने से मृतप्राय हो चुकी यह परियोजना […]

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सांसद ने कहा, जिस आबादी से यह रेललाइन गुजरेगी, वहां से 50-50 किलोमीटर की दूरी तक रेल सेवा नहीं है
औरंगाबाद कार्यालय : करीब 122 किलोमीटर लंबी बिहटा-औरंगाबाद रेललाइन परियोजना की मांग काफी दिनों बाद लोकसभा में उठा है. औरंगाबाद सांसद सुशील कुमार सिंह द्वारा यह मांग उठाये जाने से मृतप्राय हो चुकी यह परियोजना को संजीवनी मिलने की संभावना जगी है. विधानसभा चुनाव के समय भी इस परियोजना को लेकर जिले के लोगों ने आवाज उठायी थी. लेकिन, केंद्रीय रेल बजट में मामूली सी राशि इस परियोजना के नाम पर दी गयी. इससे बिहटा-औरंगाबाद रेल परियोजना पर उम्मीद लगाये लोगों में निराशा छा गयी थी.
बिहटा-औरंगाबाद रेललाइन परियोजना की मांग औरंगाबाद सांसद ने सदन में उठाया. सांसद ने सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए नक्सलग्रस्त क्षेत्र के लिए इसे अति महत्वाकांक्षी परियोजना बताया. सांसद ने कहा कि वह दक्षिण बिहार के नक्सलग्रस्त हिस्से को बिहार की राजधानी पटना से रेल मार्ग के जरिये जोड़ने के लिए बिहटा-औरंगाबाद रेललाइन परियोजना का कार्य शीघ्र प्रारंभ करने की मांग करते हैं. सांसद ने यह भी कहा कि इस रेललाइन का सर्वे हो चुका है. प्रतिवर्ष कुछ राशि टोकन के रूप में आवंटित की जाती है. इस राशि से इस परियोजना में प्रगति का कुछ भी कार्य संभव नहीं है.
सांसद ने यह भी तर्क दिया है कि यह रेल लाइन वामपंथी नक्सलग्रस्त घनी आबादी से होकर गुजरेगी. जिस आबादी से यह रेल लाइन होकर कर गुजरेगी, वर्तमान में किसी-किसी स्थान से 50-50 किलोमीटर की दूरी तक कोई भी रेल लाइन नहीं है. ऐसे में विकास की किरणों को वहां तक पहुंचाने और नक्सलवाद की समस्या की समाप्ति के लिए यह कारगर कदम साबित होगा.
इस परियोजना को पूरा होने से दिल्ली-कोलकाता मेन लाइन के मुगलसराय-पटना-आसनसोल लाइन से दिल्ली-कोलकता ग्रैंडकार्ड लाइन के कोलकाता-आसनसोल-धनबाद-मुगलसराय लाइन आपस में जुड़ जायेंगे, जिससे इस पिछड़े इलाके के विकास के अलावा व्यापार की भी संभावनाएं बनेंगी. इन सभी को देखते हुए बिहटा-औरंगाबाद रेल लाइन का सर्वेक्षण कार्य शीघ्र पूरा कराते हुए भूमि अधिग्रहण कर कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाये.
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