जिले को फिर से मिलेगी पुरानी पहचान

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– कवि सम्मेलन व मुशायरों के आयोजन का दौर एक बार फिर शुरू – मंगलवार से शुरू होंगी सांस्कृतिक गतिविधियां – सुधीर कुमार सिन्हा – औरंगाबाद : औरंगाबाद जिला सांस्कृतिक विविधता का केंद्र रहा है. यहां की मिट्टी सांस्कृतिक दृष्टि से काफी उर्वर रही है और औरंगाबाद हिंदी साहित्य व उर्दू अदब का संगम रहा […]

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– कवि सम्मेलन मुशायरों के आयोजन का दौर एक बार फिर शुरू

– मंगलवार से शुरू होंगी सांस्कृतिक गतिविधियां

– सुधीर कुमार सिन्हा –

औरंगाबाद : औरंगाबाद जिला सांस्कृतिक विविधता का केंद्र रहा है. यहां की मिट्टी सांस्कृतिक दृष्टि से काफी उर्वर रही है और औरंगाबाद हिंदी साहित्य उर्दू अदब का संगम रहा है.

साल 1991 से 2000 तक के वे भी क्या दौर थे जब हिंदी के लिए कामता सेवा केंद्र द्वारा कवि सम्मेलन शमांअदब और गोशाअदब द्वारा प्रत्येक वर्ष ऑल इंडिया मुशायरे का आयोजन होता था. इससे बनी परंपरा से औरंगाबाद की एक अलग पहचान भी कायम हो गयी थी. इस दौरान शमाअदब के मुशायरे में कैफी आजमी, खुमार बारा बंकवी, अंजुम रहबर, राहत इंदौरी ,मुनब्वर राणा गोसाअदब के मुशायरे में डॉ वसीर बद्र, तरन्नुम कानपुरी, अमीर कज्लेबास, मजरूह सुल्तानपुरी,सैयदा साने मेराज जैसे सरीखे कवि शायरों ने शिरकत की है.

उर्दू लाइब्रेरी के 85वीं वर्षगांठ पर डॉ कासीर फरदीन के संयोजन में शानदार मुशायरा तत्कालीन एसपी गुप्तेश्वर पांडेय के संयोजन में ऑल इंडिया शायरत मुशायरा का आयोजन हो चुका है. इसमें शकीना अदीब, श्यामा सिंह शबा, अन्ना देहलवी जैसी मशहूर कवियित्रियां शहर में चुकी हैं.

उस समय मुशायरों को सुनने के लिए डेहरी, सासाराम, रफीगंज, मदनपुर, शेरघाटी, गया समेत अन्य जिलों के श्रोता आते थे. औरंगाबाद पूरे देश में ओपेन मुशायरा के लिए जाना जाता था. पर, वर्ष 2000 के बाद यहां साहित्यिक सांस्कृतिक गतिविधियां बिल्कुल बंद हो गयी थी, जिससे औरंगाबाद की साहित्यिक परिप्रेक्ष्य में एक खालीपन गया था और साथ ही जिले की परंपरा भी लुप्त होती चली गयी.

लेकिन, एक बार फिर लुप्त होती इस परंपरा खोयी पहचान को वापस लाने की कोशिश की जा रही है. एक के बाद कवि सम्मेलन मुशायरों का आयोजन का सिलसिला शुरू हुआ है. इन कार्यक्रमों के जरिये औरंगाबाद को पुन: खोयी साहित्यिक सांस्कृतिक पहचान दिलाने की कवायद जारी है. इन कार्यक्रमों से नि:संदेह जिला साहित्यिक उन्नयन की दिशा में अग्रसर होगा.

साहित्यिक गतिविधियां के बराबर होने से जहां स्थानीय साहित्यकारों रचनाकारों में निराशा घर कर गयी थी. इन कार्यक्रमों के आयोजन से उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा. कामता सेवा केंद्र के तत्वावधान में मंगलवार को कवि सम्मेलन सह मुशायरा का आयोजन होगा. पिछले वर्ष भी हुए कवि सम्मेलन में मुनव्वर राणा सरीखे कई प्रख्यात कवि रचनाकारों ने शिरकत की थी.

इस बार बरेली के वसीम बरेलवी, लखनउ के नुजहत अंजुम, दिल्ली के शंभू शिखर चिराग जैन, अलवर के विनीत चौहान, आगरा की पूनम वर्मा, मेरठ के शबाब मेरठी, पटना के सुभद्रा वीरेंद्र कानपुर के प्रमोद तिवारी भाग लेंगे. इसके बाद आगामी पांच नवंबर को जिला कायस्थ महासभा द्वारा भी हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है.

इस हास्य कवि सम्मेलन में रायबरेली के साबिस्ता ब्रजेश, बिजनौर के कुमार प्रवीण, डंडा बनारसी, गाजीपुर के संज्ञा तिवारी, वाराणसी के रेयाज बनारसी सलीम शिवालवी समेत कई प्रख्यात कवि शायर शिरकत करेंगे. इस कवि सम्मेलन का संचालन आकाशवाणी पटना के अधिशासी शंकर राम करेंगे. इसके बाद 17 नवंबर को लुप्त होती अपनी पुरानी परंपरा को लाते हुए चरागअदब द्वारा मुशायरा का आयोजन किया जा रहा है. इस मुशायरे में कई शायरों के नाम पर अवार्ड देने की भी तैयारी है.

चरागअदब के संयोजक अफरोज आलम और आफताब राणा के अनुसार दिल्ली से तारिक अजीज, जबलपुर से तिलक राज पारस,उत्तरप्रदेश से जमील खैराबादी, ग्वालियर से अतुल अजनबी, नुसरत अमरोहवी,कोलकता से हबीब हासमी, इमरान राकिम, संध्या सवा कैमूर, बरखा गुप्ता, गया से नदीम जाफरी, निकहत अमरोहवी इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगे.

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