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आईएएस व इंजीनियर बेटा देखने की तमन्ना रह गयी अधूरी, बीच मंझधार में दोनों ने छोड़ा साथ

Updated at : 03 Jun 2019 7:20 AM (IST)
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आईएएस व इंजीनियर बेटा देखने की तमन्ना रह गयी अधूरी, बीच मंझधार में दोनों ने छोड़ा साथ

औरंगाबाद कार्यालय : हर मां-बाप की एक ही तमन्ना होती है कि उसकी संतान पढ़ लिख कर काबिल बने. जो अपने परिवार का भरण पोषण के साथ-साथ समाज के दायित्वों का निर्वहन करे,लेकिन जब संतान बीच मझधार में मां-बाप को छोड़ कर दुनिया को अलविदा कह जाये, तो उस मां-बाप पर क्या गुजरती है यह […]

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औरंगाबाद कार्यालय : हर मां-बाप की एक ही तमन्ना होती है कि उसकी संतान पढ़ लिख कर काबिल बने. जो अपने परिवार का भरण पोषण के साथ-साथ समाज के दायित्वों का निर्वहन करे,लेकिन जब संतान बीच मझधार में मां-बाप को छोड़ कर दुनिया को अलविदा कह जाये, तो उस मां-बाप पर क्या गुजरती है यह उनसे बेहतर कौन समझ सकता है. ओरा पंचायत के शेखपुरा गांव के लालदेव प्रसाद और इनकी पत्नी मीना देवी के साथ एक ऐसा हादसा हुआ जो शायद ताउम्र नहीं भूलेगा.

इन्होंने भी अपने बड़े बेटे अश्विनी उर्फ सोनू और आशीष उर्फ मोनू के लिए कई सपने पाल रखे थे. गांव से गरीबी को दूर करने और बेटे को पढ़ा लिखाकर बेहतर इंसान बनाने के उद्देश्य से झारखंड के बोकारो चले गये. दिन-रात ऑटो चलाकर अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाया. अश्विनी पॉलिटेक्निक की पढ़ाई कर इंजीनियर बनना चाह रहा था तो छोटा बेटा आशीष आईएएस बनने का सपना लेकर दसवीं की पढ़ाई पूरी कर रहा था.
किस्मत ने ऐसा धोखा दिया कि मां-बाप के सपने अधूरे रह गये और दोनों बेटे एक साथ बोकारो के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र के चौरा बस्ती के पास मनु महतो तालाब में डूब कर दुनिया को अलविदा कह दिया. अश्विनी और आशीष के साथ उसका दोस्त प्रताप ठाकुर भी काल के गाल में समा गया. घटना शुक्रवार की है या शनिवार की यह स्पष्ट नहीं हो सका,लेकिन शनिवार की सुबह तीनों का शव उक्त तालाब में तैरते हुए मिला.
परिजनों ने कहा-पुलिसिया जांच पर भरोसा: बोकारो के एक तालाब में शेखपुरा गांव के छात्र अश्विनी और आशीष की मौत के बाद परिजन हतोत्साहित है. उन्हे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा कि आखिर अचानक घटना हुई तो कैसे. बिलखते परिजनों ने कहा कि घटना संदेह के घेरे में है.
अब किसे बांधेगी राखी कह बिलख पड़ी बहन: अश्विनी और आशीष की मौत से लालदेव का परिवार ही नहीं,बल्कि पूरा गांव मर्माहत है. गांव वालों की भी एक उम्मीद थी कि अश्विनी और आशीष उनके सपनों को पूरा कर महादलित बस्ती शेखपुरा का नाम रोशन करेगा. पर ऐसा हुआ नहीं. दोनों भाइयों की मौत से मां-बाप तो सदमे में है ही दो छोटी बहन भी भाई की मौत पर टूट चुकी है. बहन नेहा और अन्नू ने बिलखते हुए कहा कि अब वह किसे राखी बांधेगी.
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