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डीएम अंकल! हम कैसे जाएं स्कूल

Updated at : 29 Jun 2015 8:11 AM (IST)
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डीएम अंकल! हम कैसे जाएं स्कूल

कलेर (अरवल) : डीएम अंकल! हम कैसे स्कूल जाएं. हमारा रास्ता बंद है. हमारी पढ़ाई ठप है. लोग कहते हैं कि ‘पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कुदोगे तो होगे खराब’. हम पढ़ना चाहते हैं, पर हम स्कूल ही नहीं जायेंगे, तो पढ़ेंगे कैसे. डीएम अंकल! आप पेड़ हटवा दो, नहीं तो मैं पढ़ नहीं पाऊंगा. उक्त […]

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कलेर (अरवल) : डीएम अंकल! हम कैसे स्कूल जाएं. हमारा रास्ता बंद है. हमारी पढ़ाई ठप है. लोग कहते हैं कि ‘पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कुदोगे तो होगे खराब’. हम पढ़ना चाहते हैं, पर हम स्कूल ही नहीं जायेंगे, तो पढ़ेंगे कैसे. डीएम अंकल! आप पेड़ हटवा दो, नहीं तो मैं पढ़ नहीं पाऊंगा. उक्त बातें कुप्रभावित गांवों के बच्चों का कहना है. विदित हो कि विगत 15 दिन पहले खमैनी मोड़ के समीप महुआ का एक विशाल वृक्ष मुख्य नहर के रास्ते पर गिर पड़ा था, जिसे आज तक हटाया नहीं गया.
इसे प्रशासन की निष्क्रियता कहें या लापरवाही, पर खामियाजा भुगत रहें है दर्जनों गांव के वासी. वृक्ष इतना भारी है कि आसानी से हटाया भी नहीं जा सकता. रास्ता पूरी तरह से बंद है. बलिदाद, गोपाल बिगहा, हैबतपुर, राजन बिगहा, धोबी बिगहा, राजा बिगहा, धेवई आदि कई गांवों के लोगों को जिला मुख्यालय एवं बलिदाद आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है. महिलाओं व युवतियों को कूद-फांद कर पार करने में कभी-कभी लज्जित होना भी पड़ता है, वहीं वृद्ध महिलाएं तो बगैर किसी के सहारे के पार ही नहीं कर पाती हैं.
कूद-फांद कर आते-जाते हैं लोग
इस रास्ते से जुड़े हजारों की आबादी का रास्ता बंद है. लोगों को पैदल आना-जाना पड़ रहा है. युवा वर्ग के लोग तो किसी तरह से आ-जा रहे हैं, परंतु बड़े-बुजुर्गो या वृद्ध महिलाओं को पैदल सफर करना काफी कष्ट कर हो गया है. जिनके घरों में निजी वाहन भी हैं, तो वह घरों में कैद कर रखने को विवश हैं. जरूरत पड़ने पर भी अपने निजी वाहनों का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं. कूद-फांद कर आने-जाने में सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को होती है.
बच्चे नहीं जा रहे स्कूल
दर्जनों गांव के बच्चे इसी रास्ते से विद्यालय में पढ़ने जाते हैं. सड़क बंद रहने के कारण गाड़ियां जा नहीं सकती, बड़े बच्चे तो किसी तरह से उछल-फांद कर विद्यालय आते-जाते हैं, परंतु छोटे बच्चों को मां-पिता के द्वारा लाना-पहुंचाना पड़ता है. इस समय धान की खेती का समय है, किसान खेतों में जुटे हैं, ऐसे में उनके बच्चे स्कूल जाने से वंचित हो गये हैं.
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