पाकिस्तान और हुआ कंगाल, गरीबों की संख्या बढ़कर 7 करोड़ पहुंची

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Muhammad Aurangzeb presented the copy of Pakistan Economic Survey- 2025-26 to the Prime Minister Muhammad Shehbaz Sharif

मुहम्मद औरंगजेब ने पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ को पाकिस्तान इकोनॉमिक सर्वे- 2025-26 की कॉपी सौंपी

Pakistan poverty : पाकिस्तान का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 जारी हो गया है. इस सर्वेक्षण ने यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बहुत खस्ता है और वहां गरीबों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. विश्व बैंक के अनुसार पाकिस्तान की 25% आबादी गरीब है.

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Pakistan Poverty : भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान ने जिस तरह आतंकवादियों को ट्रेनिंग और आश्रय दिया और विकास से दूर होता गया, उसका परिणाम सामने नजर आ रहा है. पीटीआई न्यूज एजेंसी के अनुसार पाकिस्तान के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार वहां पिछले छह वर्षों में गरीबी सात प्रतिशत बढ़ गई है.

पाकिस्तान में गरीबों की कुल संख्या 7 करोड़

पाकिस्तान के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार लगभग 2.7 करोड़ नए लोग गरीबी के दायरे में आ गए हैं और इसके साथ ही देश में कुल गरीबों की संख्या बढ़कर सात करोड़ हो गई है. देश के राष्ट्रीय आर्थिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है. पाकिस्तान आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26, को बृहस्पतिवार को वार्षिक प्रक्रिया के तहत जारी किया गया. देश की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए आर्थिक सर्वेक्षण जारी किया जाता है.

बलूचिस्तान में सबसे अधिक 47 प्रतिशत गरीब

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में बात सामने आई है कि वर्ष 2018-19 में गरीबी का स्तर 21.9 प्रतिशत था, जो 2024-25 में बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गया. सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण गरीबी 28.2 प्रतिशत से बढ़कर 36.2 प्रतिशत हो गई जबकि शहरी गरीबी 11 प्रतिशत से बढ़कर 17.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है.प्रांतीय स्तर के आंकड़ों से पता चलता है कि सभी क्षेत्रों में गरीबी में वृद्धि दर्ज की गई है. पंजाब प्रांत में यह 16.5 प्रतिशत से बढ़कर 23.3 प्रतिशत हो गई, सिंध में 24.5 प्रतिशत से बढ़कर 32.6 प्रतिशत, खैबर पख्तूनख्वा में 28.7 प्रतिशत से बढ़कर 35.3 प्रतिशत और बलूचिस्तान में 41.8 प्रतिशत से बढ़कर 47 प्रतिशत हो गई है.बलूचिस्तान में गरीबी दर सबसे अधिक दर्ज की गई, जबकि चारों प्रांतों में पंजाब में गरीबी दर सबसे कम रही.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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