अररिया के भरगामा में किसानों की बदली किस्मत, ड्रैगन फ्रूट की खेती से हो रही लाखों की कमाई
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 18 May 2026 10:41 AM
ड्रैगन फ्रूट की खेती की जानकारी साझा करते किसान
Dragon Fruit Farming Success: अररिया के भरगामा में अब खेतों में सिर्फ मक्का और गेहूं ही नहीं, बल्कि ‘सुपरफूड’ कहे जाने वाले ड्रैगन फ्रूट भी लहलहा रहे हैं. किसानों के लिए यह खेती आर्थिक समृद्धि की नई राह खोल रही है और पारंपरिक खेती की तस्वीर बदल रही है.
Dragon Fruit Farming Success: भरगामा, अररिया से राष्ट्र भूषण पिंटू की खबर. अररिया जिले के भरगामा प्रखंड में किसानों ने ड्रैगन फ्रूट की खेती को नई उम्मीद और बेहतर आमदनी के विकल्प के रूप में अपनाना शुरू कर दिया है. स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाने वाला यह फल अब किसानों के लिए आर्थिक मजबूती का जरिया बनता जा रहा है. बाजार में बढ़ती मांग और बेहतर मुनाफे के कारण किसान पारंपरिक खेती छोड़कर इस ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.
‘सुपरफूड’ बन रहा किसानों का सहारा
ड्रैगन फ्रूट को दुनियाभर में सुपरफूड के रूप में पहचान मिल चुकी है. इसमें एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन सी, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह इम्यूनिटी बढ़ाने, वजन नियंत्रित रखने और पाचन तंत्र को मजबूत करने में मददगार माना जाता है.
स्वास्थ्य के प्रति लोगों की बढ़ती जागरूकता ने बाजार में इसकी मांग को तेजी से बढ़ाया है. यही वजह है कि भरगामा के किसान अब इसे लाभकारी फसल के रूप में देख रहे हैं.
भरगामा की मिट्टी और मौसम बने वरदान
स्थानीय किसान गुड्डू यादव बताते हैं that भरगामा क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए काफी अनुकूल है. उन्होंने कृषि विभाग की “आत्मा” योजना से प्रेरित होकर इसकी खेती शुरू की थी. अब यह खेती उन्हें पारंपरिक फसलों की तुलना में कहीं ज्यादा फायदा दे रही है.
ड्रैगन फ्रूट की खेती में पानी की जरूरत कम होती है और यह शुष्क मौसम में भी आसानी से उगाया जा सकता है. यही कारण है कि किसान इसे कम जोखिम और ज्यादा मुनाफे वाली फसल मान रहे हैं.
एक बार लगाओ, वर्षों तक कमाओ
ड्रैगन फ्रूट की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी उत्पादन क्षमता है. किसान बताते हैं कि इसके पौधे 20 से 25 वर्षों तक फल देते हैं. शुरुआती वर्षों में उत्पादन कम होता है, लेकिन तीसरे और पांचवें साल तक उत्पादन कई गुना बढ़ जाता है.
बाजार में इसका थोक भाव करीब 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है. ऐसे में एक यूनिट से लाखों रुपये की कमाई संभव हो रही है. किसानों का कहना है कि जहां गेहूं और मक्का की खेती में लागत ज्यादा और मुनाफा कम था, वहीं ड्रैगन फ्रूट ने उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत की है.
भरगामा बन सकता है नया हब
किसानों और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह खेती का विस्तार हुआ तो आने वाले समय में भरगामा ड्रैगन फ्रूट उत्पादन के लिए नई पहचान बना सकता है. इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्र की कृषि व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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