राजीव गांधी खेल रत्न के लिए नामित होने के बाद बोले सरदार परेशानियों को कभी खेल पर हावी नहीं होने दिया

Published at :03 Aug 2017 3:44 PM (IST)
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राजीव गांधी खेल रत्न के लिए नामित होने के बाद बोले सरदार परेशानियों को कभी खेल पर हावी नहीं होने दिया

नयी दिल्ली : देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न के लिए नामित पूर्व हाकी कप्तान और स्टार मिडफील्डर सरदार सिंह ने कहा है कि उन्होंने अपनी निजी परेशानियों को खेल पर कभी हावी नहीं होने दिया और ना ही कभी उनका ध्यान अपने प्रदर्शन से भटका. सरदार और पैरालंपिक में दो स्वर्ण […]

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नयी दिल्ली : देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न के लिए नामित पूर्व हाकी कप्तान और स्टार मिडफील्डर सरदार सिंह ने कहा है कि उन्होंने अपनी निजी परेशानियों को खेल पर कभी हावी नहीं होने दिया और ना ही कभी उनका ध्यान अपने प्रदर्शन से भटका. सरदार और पैरालंपिक में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पैरालंपियन देंवेंद्र सिंह झझारिया के नाम की सिफारिश जस्टिस सी के ठक्कर ( रिटायर्ड ) की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने की है.

समिति ने सुझाव दिया है कि दोनों को संयुक्त रुप से भी पुरस्कार दिया जा सकता है. अंतिम फैसला खेल मंत्रालय लेगा. पाकिस्तान के खिलाफ 2006 में सीनियर हाकी टीम में पदार्पण करने वाले सरदार ने बातचीत में कहा , ‘ ‘ मेरे लिए यह सुखद अचरज भरी खबर है. मैं 15 – 16 साल से खेल रहा हूं और हॉकी इंडिया ने नाम भेजा था तो उम्मीद थी कि पुरस्कार मिल सकता है क्योंकि मेरा प्रदर्शन भी अच्छा रहा था. मैं इसका श्रेय अपनी टीम को देना चाहता हूं जिसके सहयोग के बिना यह संभव नहीं था.

‘ ‘ निजी जीवन में पिछले साल कई उतार चढाव झेल चुके इस अनुभवी सेंटर हाफ ने कहा , ‘ ‘ मैं खुद हैरान था कि हो क्या रहा है. मेरा ध्यान भटकाने की पूरी कोशिश की गयी लेकिन मैंने पूरा फोकस हाकी पर रखा. मैं अपने खेल के जरिये जवाब देना चाहता था और मेरी कोशिश लगातार यही है कि अपनी हॉकी के लिये मुझे जाना जाये. ‘ ‘ उन्होंने कहा कि अपने लिये उन्होंने कुछ लक्ष्य तय कर रखे हैं और उन्हें हासिल करने के लिये पूरी मेहनत कर रहे हैं.

आठ साल तक भारत के कप्तान रहे सरदार ने कहा , ‘ ‘ अगले साल काफी हाकी खेली जानी है जिसमें एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और फिर भारत में होने वाला विश्व कप शामिल है. हमने एशियाड में स्वर्ण पदक जीतकर ओलंपिक के लिये क्वालीफाई किया था और इस बार भी हमारा लक्ष्य वही होगा.मैने अपने लिये भी लक्ष्य तय कर रखे हैं और उन्हें हासिल करने के लिये पूरी मेहनत कर रहा हूं.
पिछले साल रियो ओलंपिक से ठीक पहले भारतीय टीम की कमान उनकी जगह गोलकीपर पी आर श्रीजेश को सौंपी गई थी लेकिन सरदार ने कहा कि इससे उनका मनोबल नहीं टूटा. उन्होंने कहा , ‘ ‘ ऐसा नहीं है कि कप्तानी नहीं होने से टीम में मेरी भूमिका बदल गई है.अभी भी सीनियर खिलाडयिों का काम युवाओं को मार्गदर्शन देने का भी है जो हम कर रहे हैं. युवाओं को भी दबाव का सामना करने के लिये तैयार करना जरुरी है और श्रीजेश या मौजूदा कप्तान मनप्रीत की अगुवाई में टीम अच्छा प्रदर्शन करेगी. ‘ ‘ जून में लंदन में हुए विश्व हाकी लीग सेमीफाइनल में भारत निराशाजनक छठे स्थान पर रहा जिसमें कनाडा और मलेशिया जैसी टीमों ने उसे हरा दिया. इसके बावजूद सरदार ने कहा कि भारतीय हाकी सही दिशा में बढ़ रही है.
उन्होंने कहा , ‘ ‘ हमने भी नहीं सोचा था कि कनाडा और मलेशिया से हार जायेंगे लेकिन विश्व हाकी में उलटफेर होते रहते हैं. अजलन शाह कप में जापान ने आस्ट्रेलिया को हरा दिया. विश्व हाकी लीग में अपनी गलतियों से सबक लेकर टीम ने काफी मेहनत की है और अगले टूर्नामेंटों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिलेगा. ‘ ‘
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