देवदत्त पडिक्कल (Devdutt Padikkal) ने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 (Vijay Hazare Trophy 2025-26) में अपने शानदार प्रदर्शन से सभी का ध्यान खींचा है. लगातार रन बनाने और मुश्किल हालात में पारी संभालने की उनकी क्षमता ने उन्हें भारतीय वनडे टीम की दौड़ में मजबूत दावेदार बना दिया है. न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी वनडे सीरीज से पहले चयनकर्ताओं पर उन्हें मौका देने का दबाव बढ़ता दिख रहा है. टीम में चोट और संभावित बदलावों के बीच पडिक्कल का यह फॉर्म भारत के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आया है.
मुश्किल हालात में संभाली पारी
विजय हजारे ट्रॉफी में त्रिपुरा के खिलाफ कर्नाटक का मुकाबला आसान नहीं रहा. शुरुआती ओवरों में ही मयंक अग्रवाल और करुण नायर के आउट होने से टीम दबाव में आ गई थी. सिर्फ 6 रन पर दो विकेट गिरने के बाद पारी लड़खड़ा गई थी. ऐसे समय में देवदत्त पडिक्कल ने जिम्मेदारी संभाली और संयम के साथ बल्लेबाजी की. उन्होंने रन बनाने के साथ साथ स्ट्राइक भी संभाली. उनकी यह पारी बताती है कि वह दबाव में भी शांत रहते हैं और टीम को संकट से बाहर निकाल सकते हैं.
अहम साझेदारियों से मजबूत स्कोर
पडिक्कल ने स्मरण रविचंद्रन अग्रवाल के साथ मिलकर बड़ी साझेदारी की. दोनों ने 151 गेंदों पर 136 रन जोड़े और पारी को स्थिरता दी. इसके बाद केएल राहुल के साथ भी उन्होंने तेजी से रन बनाए. राहुल ने छोटी लेकिन उपयोगी पारी खेली. स्मरण अग्रवाल ने भी अर्धशतक लगाया. इन साझेदारियों के कारण कर्नाटक एक मजबूत स्कोर तक पहुंच सका. पडिक्कल ने अपने शतक तक पहुंचने में धैर्य दिखाया और सही गेंदों पर ही आक्रामक शॉट खेले.
पूरे टूर्नामेंट में शानदार निरंतरता
देवदत्त पडिक्कल का प्रदर्शन किसी एक मैच तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने टूर्नामेंट की शुरुआत झारखंड के खिलाफ शतक के साथ की. इसके बाद केरल के खिलाफ भी उन्होंने बड़ी पारी खेली. तमिलनाडु के खिलाफ असफलता जरूर मिली लेकिन उन्होंने इसे खुद पर हावी नहीं होने दिया. अगले ही मैच में पुडुचेरी के खिलाफ शतक जड़कर उन्होंने शानदार वापसी की. लगातार बड़े स्कोर बनाना किसी भी बल्लेबाज के लिए आसान नहीं होता लेकिन पडिक्कल ने इसे नियमित आदत बना लिया है.
लिस्ट ए क्रिकेट में मजबूत रिकॉर्ड
लिस्ट ए क्रिकेट में देवदत्त पडिक्कल का रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली है. उन्होंने कम पारियों में ही कई शतक और अर्धशतक लगाए हैं. उनका औसत बताता है कि वह लंबी पारी खेलने में माहिर हैं. घरेलू क्रिकेट में ऐसा प्रदर्शन सीधे तौर पर चयनकर्ताओं का ध्यान खींचता है. 50 ओवर के फॉर्मेट में निरंतरता सबसे अहम होती है और पडिक्कल इस कसौटी पर खरे उतरते दिख रहे हैं.
वनडे टीम में जगह की मजबूत दावेदारी
भारतीय टीम में इस समय बदलाव का दौर चल रहा है. कुछ खिलाड़ी चोट से जूझ रहे हैं और कुछ को आराम दिया जा सकता है. ऐसे में देवदत्त पडिक्कल जैसे फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज को मौका मिलना स्वाभाविक लगता है. उन्होंने पहले ही टेस्ट और टी20 में भारत का प्रतिनिधित्व किया है. अब वनडे में मौका मिलना बस समय की बात लगती है. यदि उन्हें मौका मिलता है तो उनका आत्मविश्वास और मौजूदा फॉर्म टीम इंडिया के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
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