Hardik Pandya Century in VHT: निरंजन शाह स्टेडियम में खेले गए विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 (Vijay Hazare Trophy 2025-26) के ग्रुप स्टेज मुकाबले में हार्दिक पंड्या (Hardik Pandya) ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं. बड़ौदा और विदर्भ (Baroda vs Vidarbha) के बीच हुए इस मुकाबले में बड़ौदा की हालत बेहद खराब हो चुकी थी. आधी टीम सिर्फ 71 रन पर पवेलियन लौट चुकी थी. ऐसे मुश्किल हालात में हार्दिक पंड्या ने मोर्चा संभाला और अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से मैच का रुख पलट दिया. सातवें नंबर पर उतरकर हार्दिक ने शतक जड़ते हुए दर्शकों को रोमांच से भर दिया और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया.
मुश्किल हालात में फंसी थी बड़ौदा
विदर्भ ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया और उसके गेंदबाजों ने इस फैसले को सही साबित किया. शुरुआती ओवरों में ही बड़ौदा के टॉप ऑर्डर पर जबरदस्त दबाव बना. एक के बाद एक विकेट गिरते चले गए. स्कोर बोर्ड पर सिर्फ 71 रन थे और आधी टीम आउट हो चुकी थी. ऐसा लग रहा था कि बड़ौदा की पारी ज्यादा देर नहीं टिकेगी और टीम सस्ते में सिमट जाएगी.
सातवें नंबर पर उतरे हार्दिक पंड्या
टीम के संकट में होने पर हार्दिक पंड्या बल्लेबाजी के लिए आए. वह सातवें नंबर पर उतरे और आते ही उन्होंने हालात को समझा. शुरुआत में उन्होंने संभलकर खेला और स्ट्राइक रोटेट करने पर ध्यान दिया. कुछ ओवर बाद जब वह क्रीज पर जम गए तो उनके शॉट्स में आत्मविश्वास साफ दिखने लगा.
68 गेंद में जड़ा तूफानी शतक
हार्दिक पंड्या ने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में उतरते ही अपनी क्लास दिखा दी. उन्होंने सिर्फ 68 गेंद में शतक पूरा किया. यह शतक न केवल तेज था बल्कि पूरी तरह मैच की मांग के अनुसार खेला गया था. हार्दिक ने गेंदबाजों पर दबाव बनाया और मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट लगाए. उनके शतक के बाद विदर्भ के गेंदबाज पूरी तरह बैकफुट पर चले गए.
चौकों और छक्कों से सजी पारी
हार्दिक पंड्या ने अपनी पारी में कुल 92 गेंदों का सामना किया. उन्होंने 144 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए 133 रन बनाए. इस दौरान उनके बल्ले से 8 चौके और 11 छक्के निकले. खास बात यह रही कि अधिकतर छक्के उन्होंने सीधे और लॉन्ग ऑन लॉन्ग ऑफ की दिशा में लगाए. इससे साफ दिखा कि उनकी टाइमिंग और ताकत दोनों शानदार थी.
बड़ौदा को दिलाई मजबूती
हार्दिक पंड्या की इस पारी ने बड़ौदा को एक सम्मानजनक और मजबूत स्कोर तक पहुंचा दिया. जहां एक समय टीम जल्दी ऑल आउट होने के कगार पर थी वहीं हार्दिक की बदौलत मुकाबले में वापसी हुई. उनकी यह पारी युवा खिलाड़ियों के लिए भी सीख थी कि दबाव में कैसे धैर्य और आक्रामकता के बीच संतुलन बनाया जाता है. विजय हजारे ट्रॉफी के इस मुकाबले में हार्दिक पंड्या का शतक लंबे समय तक याद किया जाएगा.
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