बंगाल में 28 साल का सबसे बड़ा भूचाल, ममता में ‘लेनिन’ को देखने वाले रीतब्रत बने टीएमसी के 58 बागियों के ‘बॉस’

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 03 Jun 2026 9:13 PM

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Ritabrata Banerjee: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 58 बागी विधायकों ने निष्कासित नेता रीतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया है. बागी गुट ने विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस को अलग दल की मान्यता के लिए पत्र सौंप दिया है, जिससे टीएमसी में ऐतिहासिक टूट हो गयी है.

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Ritabrata Banerjee: पश्चिम बंगाल की सियासत में पिछले 28 सालों का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक भूचाल लाने वाले चेहरे का नाम सामने आ चुका है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) में भीषण बगावत के बीच पार्टी से निष्कासित नेता रीतब्रत बनर्जी अब बंगाल के ‘एकनाथ शिंदे’ बनकर उभरे हैं. बुधवार को टीएमसी के 58 बागी विधायकों ने रीतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया है.

स्पीकर रथिंद्र बोस से मिले बागी विधायक

बागियों के इस गुट ने विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) रथिंद्र बोस से मुलाकात कर उन्हें अलग विधायक दल के रूप में मान्यता देने की आधिकारिक चिट्ठी भी सौंप दी. कभी ममता बनर्जी की राजनीति में रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन की झलक देखने वाले रीतब्रत आज खुद ‘दीदी’ के राजनीतिक साम्राज्य को ढाहने वाले सबसे बड़े विद्रोही बन गये हैं.

माकपा और टीएमसी दोनों से निष्कासित इकलौते ‘चाणक्य’

रीतब्रत बनर्जी का राजनीतिक सफरनामा जितना दिलचस्प है, उतना ही विरोधाभासों से भी भरा है. वे संभवतः बंगाल के इतिहास के इकलौते ऐसे बड़े नेता हैं, जिन्हें वामपंथी पार्टी सीपीएम (CPIM) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) दोनों ही विचारधाराओं ने अपनी पार्टी से धक्के मारकर निकाला, लेकिन आज वे दोनों को पछाड़कर विपक्ष के सबसे बड़े नेता बन गये हैं.

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ममता को बताते थे जनहितैषी

रीतब्रत बनर्जी (46) ने कभी सार्वजनिक रूप से कहा था कि ममता बनर्जी को लाखों लोगों के बीच जमीन पर काम करते देखकर ही उन्हें जनहितैषी राजनीति पर लेनिन का प्रसिद्ध कथन समझ आया था. आज ठीक उसके उलट रीतब्रत ने ममता बनर्जी की नाक के नीचे से 58 विधायकों को तोड़कर तृणमूल के इतिहास की सबसे बड़ी बगावत को अंजाम दिया, जिसने महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन की यादें ताजा कर दी.

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एसएफआई के पोस्टर बॉय से राज्यसभा और ‘लक्जरी लाइफ’ का विवाद

धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने और टेलीविजन बहसों में विरोधियों के छक्के छुड़ाने वाले रीतब्रत बनर्जी का छात्र राजनीति से लेकर इस विद्रोही नेता बनने तक का सफर बेहद नाटकीय है.

बुद्धदेव और येचुरी के दुलारे थे रीतब्रत

वर्ष 2008 में एसएफआई (SFI) के महासचिव के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले रीतब्रत को पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और सीताराम येचुरी का बेहद करीबी माना जाता था. इसी रसूख के कारण माकपा ने उन्हें महज 35 साल की उम्र में वर्ष 2014 में राज्यसभा भेज दिया था, जिससे अलीमुद्दीन (माकपा मुख्यालय) के कई वरिष्ठ नेता नाराज हो गये थे.

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Ritabrata Banerjee: लग्जरी लाइफ और निष्कासन

खुद को कम्युनिस्ट कहने वाले रीतब्रत की लक्जरी लाइफस्टाइल (महंगे शौक) पर जब उनकी ही पार्टी के साथियों ने सवाल उठाये, तो वर्ष 2017 में माकपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया. माकपा से निकलने के बाद वे मुकुल रॉय और कैलाश विजयवर्गीय जैसे भाजपा नेताओं के करीब आये. हालांकि, एक महिला से जुड़े मामले के बाद उन्होंने अपना पैंतरा बदला और वर्ष 2020 में औपचारिक रूप से टीएमसी का दामन थाम लिया था.

ममता के चक्रव्यूह को तोड़ेगा रीतब्रत का मास्टरस्ट्रोक!

बुधवार को ममता बनर्जी द्वारा पार्टी की सभी कमेटियां भंग किये जाने और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बीच रीतब्रत बनर्जी का बागी गुट का मुखिया बनना टीएमसी के ताबूत में आखिरी कील माना जा रहा है. 58 विधायकों का यह आंकड़ा विधानसभा में टीएमसी को दोफाड़ करने के लिए कानूनी रूप से पूरी तरह मजबूत है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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