ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक के घर पहुंची ED की टीम, बंगाल की राजनीति में भारी भूचाल

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 03 Jun 2026 7:41 PM

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ED at Abhishek Banerjee Residence: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास पर पहुंचकर शिक्षक भर्ती घोटाले में नया समन दिया है. बगावत और राजनीतिक संकट के बीच ईडी की कार्रवाई से बंगाल में हड़कंप मच गया है.

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ED at Abhishek Banerjee Residence: पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी ऐतिहासिक उथल-पुथल और तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत के बीच, केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम बुधवार को अभिषेक बनर्जी के घर पहुंची. प्रवर्तन निदेशालय की स्पेशल टीम केंद्रीय सुरक्षा बलों (CRPF) के साथ अचानक कालीघाट इलाके में स्थित अभिषेक बनर्जी के निजी आवास गयी. शिक्षक भर्ती घोटाला (Teachers Recruitment Scam) मामले में उन्हें नोटिस थमाया.

कालीघाट की घेराबंदी शुरू

केंद्रीय जांच एजेंसी की गाड़ियों का काफिला जैसे ही हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित अभिषेक बनर्जी के घर के बाहर रुका, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. टीएमसी के बचे-खुचे कार्यकर्ता और नेता तुरंत मौके पर जुटने लगे, लेकिन भारी संख्या में तैनात सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों ने पूरे आवास को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया.

ईडी को मिले थे इनपुट्स- भागने की फिराक में हैं अभिषेक

केंद्रीय जांच एजेंसी को इस बात के पुख्ता इनपुट मिले थे कि राज्य में मचे सांगठनिक संकट और पार्षदों-विधायकों के लगातार हो रहे दलबदल के बीच अभिषेक बनर्जी कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए राज्य या देश से बाहर भागने की योजना बना रहे हैं. इसके बाद एजेंसी ने तुरंत उनके घर पहुंचकर समन थमाने का फैसला किया.

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शिक्षक भर्ती घोटाला और ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ का वो सीक्रेट

जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों का दावा है कि गिरफ्तार टीएमसी नेताओं (पार्थ चटर्जी और कुंतल घोष जैसे नेता) से पूछताछ और हाल ही में जब्त किये गये डिजिटल दस्तावेजों से कुछ नये बैंक खातों और शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) का पता चला है. इन कंपनियों के जरिये गरीब युवाओं से नौकरी के नाम पर वसूले गये करोड़ों रुपए को सफेद किया गया था.

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लीप्स एंड बाउंड्स कंपनी पर शिकंजा

इस घोटाले की मुख्य कड़ियां लीप्स एंड बाउंड्स (Leaps and Bounds) नाम की कंपनी से जुड़ी हैं, जिसमें अभिषेक बनर्जी ऊंचे पद पर रह चुके हैं. इस कंपनी के वित्तीय लेन-देन और भर्ती घोटाले के मुख्य आरोपियों के बीच हुए सीधे आर्थिक समझौतों को लेकर अभिषेक से एजेंसी कड़े सवाल-जवाब करने वाली है.

ED at Abhishek Banerjee Residence: ममता को लगा तीसरा महा-झटका

बुधवार का दिन ममता बनर्जी और उनके परिवार के लिए किसी ‘कयामत’ से कम नहीं रहा. सुबह से शाम तक टीएमसी के पैर उखड़ते चले गये. सुबह में रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 बागी विधायकों ने अलग गुट बनाने का दावा ठोका और ममता बनर्जी ने खुद पूरी राज्य कमेटियां भंग कर दीं. दोपहर को मेयर फिरहाद हकीम ने इस्तीफा दे दिया. शाम होते-होते ममता के ‘वारिस’ अभिषेक बनर्जी के घर प्रवर्तन निदेशालय की दस्तक ने पार्टी सुप्रीमो को बेहद परेशान कर दिया.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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