दिल्ली में बागी सांसदों से भिड़े कल्याण बनर्जी, कुणाल घोष विधानसभा से मार्शल आउट और निलंबित

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कल्याण बनर्जी और कुणाल घोष.

कल्याण बनर्जी और कुणाल घोष.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस का अंदरूनी कलह लोकसभा और विधानसभा में भी देखने को मिल रहा है. संसद और विधानसभा से पार्टी के नेताओं के बीच झड़प और निलंबन की खबरें आयी हैं. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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Bengal Politics Chaos: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद पार्टी में फूट का असर संसद (लोकसभा) और पश्चिम बंगाल विधानसभा में दिखने लगा है. बुधवार (22 जुलाई) को लोकसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद ममता बनर्जी गुट और बागी नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के सांसदों के बीच झड़प हुई. इसके बाद कल्याण बनर्जी को मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया. कोलकाता में बंगाल विधानसभा के भीतर भी हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद टीएमसी विधायक कुणाल घोष को मार्शल की मदद से बाहर निकालकर दिन भर के लिए निलंबित कर दिया गया.

कल्याण बनर्जी और टीएमसी के बागी सांसदों में नोंकझोंक

लोकसभा में बुधवार को हंगामे के कारण सदन स्थगित होने के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी और बागी सांसदों (मिताली बाग, शताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तीदार) की नयी पार्टी नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के सांसदों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई. अन्य सांसदों के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ.

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काकोली की शिकायत पर निलंबित हुए कल्याण बनर्जी

घटना के तुरंत बाद मिताली बाग, काकोली घोष दस्तीदार और NCPI के अन्य सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कक्ष में पहुंचे और कल्याण की शिकायत की. लिखित शिकायत मिलने के बाद स्पीकर ने कल्याण बनर्जी को पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया.

विधानसभा में मार्शल आउट हुए कुणाल घोष

पश्चिम बंगाल विधानसभा में गृह एवं पहाड़ी मामलों के विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान बुधवार को अभूतपूर्व हंगामा हुआ. हंगामा तब शुरू हुआ, जब नेता प्रतिपक्ष रीतब्रत बनर्जी खेमे के मुख्य सचेतक अखरुज्जमां बोलने के लिए खड़े हुए. ममता बनर्जी के कालीघाट गुट के विधायक कुणाल घोष तुरंत उनकी माइक के सामने जाकर खड़े हो गये. आरोप लगाने लगे कि वक्ताओं की सूची से उनका नाम जान-बूझकर हटाया गया है.

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स्पीकर की चेतावनी के बाद भी शांत नहीं हुए कुणाल

अध्यक्ष रथींद्र बोस की बार-बार की चेतावनी के बावजूद जब घोष शांत नहीं हुए, तो अध्यक्ष ने मार्शल को उन्हें बाहर निकालने का निर्देश दिया. मार्शल के साथ हुई धक्का-मुक्की के दौरान कुणाल घोष लड़खड़ा भी गये. फिर उन्हें जबरन सदन से बाहर निकाला गया.

शुभेंदु अधिकारी का सुझाव और निलंबन

उद्योग मंत्री तापस रॉय ने कुणाल घोष को पूरे सत्र के लिए निलंबित करने की मांग की, लेकिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि उन्हें पूरे सत्र के लिए निलंबित कर ‘नायक’ बनाने की जरूरत नहीं है. एक दिन का निलंबन पर्याप्त होगा. इसके बाद सर्वसम्मति से उन्हें दिनभर के लिए निलंबित कर दिया गया.

ममता गुट के लोगों को न बोलने देने का आरोप

घटना के बाद कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी गुट के विधायकों को सदन में बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है. सूची से नाम जान-बूझकर टीएमसी कालीघाट गुट के लोगों के नाम काटे जा रहे हैं. टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने विधायक को जबरन बाहर निकाले जाने को विधानसभा की ‘गरिमा और अखंडता’ पर हमला करार दिया.


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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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