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शीतला सप्तमी पर करें जरूर सुनें ये कथा

Updated at : 10 Mar 2026 7:00 AM (IST)
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Shitala Mata Katha

शीतला सप्तमी व्रत कथा

Sheetala Saptami 2026: शीतला सप्तमी 11 मार्च 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन माता शीतला की पूजा और बासी भोजन का भोग लगाने से रोगों से रक्षा, सुख-समृद्धि और परिवार के स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है.

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Sheetala Saptami 2026: हिंदू धर्म में अनेक देवी-देवताओं की पूजा की जाती है और देवी शीतला भी उनमें से एक महत्वपूर्ण देवी मानी जाती हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी शीतला को माता पार्वती का ही स्वरूप माना जाता है. हर वर्ष चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को देवी शीतला की पूजा की जाती है, जिसे शीतला अष्टमी कहा जाता है.

इस दिन भक्त माता शीतला की विधि-विधान से पूजा करते हैं और उन्हें ठंडे भोजन का भोग लगाते हैं. मान्यता है कि इससे घर-परिवार को रोगों से रक्षा मिलती है और सुख-समृद्धि बनी रहती है.

शीतला सप्तमी 2026 की तिथि

पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में शीतला सप्तमी का पर्व 10 मार्च को मनाया जाएगा. इस दिन भक्त सुबह से शाम तक माता शीतला की पूजा कर सकते हैं.

पूजा मुहूर्त: 10 मार्च 2026 को सुबह 06:37 बजे से शाम 06:26 बजे तक रहेगा.

सप्तमी तिथि की शुरुआत: 9 मार्च 2026 की रात 11:27 बजे से होगी.

सप्तमी तिथि का समापन: 11 मार्च 2026 की रात 01:54 बजे पर होगा.

इस दिन श्रद्धालु माता शीतला की पूजा करते हैं और उन्हें बासी भोजन का भोग लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं.

शीतला अष्टमी पर ठंडे भोजन का महत्व

शीतला अष्टमी की पूजा में एक खास परंपरा निभाई जाती है. इस दिन देवी को ठंडा भोजन और जल अर्पित किया जाता है. इसलिए एक दिन पहले ही भोजन बनाकर रखा जाता है और अगले दिन उसी भोजन का भोग लगाया जाता है.

इसी कारण इस पर्व को कई स्थानों पर बसोड़ा भी कहा जाता है. मान्यता है कि इससे घर में शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है.

शीतला सप्तमी की पौराणिक कथा

प्राचीन समय की बात है. एक गांव में एक ब्राह्मण परिवार रहता था. उस परिवार की ब्राह्मणी बहुत धनवान और धार्मिक प्रवृत्ति की थी, लेकिन वह स्वच्छता और व्रत-नियमों के पालन में लापरवाही करती थी.

एक बार गांव में शीतला माता की पूजा का दिन आया. सभी महिलाएं माता की पूजा की तैयारी कर रही थीं, लेकिन ब्राह्मणी ने इस व्रत को महत्व नहीं दिया. उसने ताजे भोजन बनाकर नियम तोड़ दिया और माता की पूजा भी नहीं की.

इससे माता शीतला क्रोधित हो गईं और उसके बच्चों को चेचक रोग से ग्रसित कर दिया. घर में दुख और परेशानी फैल गई. तब ब्राह्मणी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सच्चे मन से माता शीतला की पूजा की और बासी भोजन का भोग लगाया.

माता उसकी भक्ति से प्रसन्न हुईं और उसके बच्चों को रोग से मुक्त कर दिया.

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कथा से मिलने वाला संदेश

इस कथा से हमें यह सीख मिलती है कि देवी-देवताओं के व्रत और नियमों का पालन करना चाहिए. साथ ही स्वच्छता, श्रद्धा और विश्वास का जीवन में विशेष महत्व है.

मान्यता है कि जो भक्त शीतला सप्तमी या अष्टमी के दिन श्रद्धा से माता शीतला की पूजा करता है, उसके परिवार को रोगों से रक्षा और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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