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Rath Yatra 2025: भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद, न केवल भोजन, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव

Updated at : 17 Jun 2025 7:26 AM (IST)
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Rath Yatra 2025 bhagwan jagannath ka mahaprasad

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Rath Yatra 2025: भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद केवल भोजन नहीं, बल्कि एक दिव्य और आध्यात्मिक अनुभव है. यह प्रसाद श्रद्धा, समानता और भक्ति का प्रतीक है, जिसे हर जाति और धर्म के लोग बिना भेदभाव के ग्रहण कर सकते हैं. इसे ग्रहण करना भगवान की कृपा पाने जैसा माना जाता है.

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Rath Yatra 2025:  जगन्नाथ रथ यात्रा हर वर्ष ओडिशा के पुरी में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है और इस बार यह शुभ यात्रा 27 जून से आरंभ होगी. इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हैं. हजारों-लाखों श्रद्धालु इस अलौकिक दर्शन का लाभ लेने के लिए दूर-दूर से पुरी पहुंचते हैं. रथ यात्रा के दौरान केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि महाप्रसाद का भी विशेष महत्व होता है, जिसे श्रीमंदिर में अत्यंत श्रद्धा और नियमपूर्वक तैयार किया जाता है. आइए, जानते हैं इस महाप्रसाद की खासियत और इससे जुड़ी परंपराएं.

भगवान जगन्नाथ का प्रसाद है आध्यात्मिक विश्वास

ओडिशा के पुरी में स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर में प्रतिदिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को जो भोग अर्पित किया जाता है, उसे ‘महाप्रसाद’ कहा जाता है. यह केवल एक धार्मिक प्रसाद नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विश्वास, परंपरा और समर्पण का जीवंत उदाहरण है. इसकी विशेषता यह है कि इसे सभी जाति, धर्म और वर्ग के लोग समान रूप से ग्रहण कर सकते हैं — यही इसे ‘महाप्रसाद’ बनाता है.

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बनते हैं 56 भोग

इस प्रसाद को मंदिर के दक्षिण भाग में स्थित विश्वविख्यात रसोईघर में तैयार किया जाता है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर-रसोईघर माना गया है. यहां हर दिन लकड़ी की अग्नि पर, मिट्टी के पात्रों में सात्त्विक भोजन बिना लहसुन और प्याज़ के पकाया जाता है. 56 प्रकार के व्यंजन यानी छप्पन भोग इसमें शामिल होते हैं.

इस रसोई से जुड़ी एक चमत्कारी बात यह है कि लाखों श्रद्धालुओं को भोजन परोसे जाने के बावजूद कभी प्रसाद की कमी नहीं होती, और न ही वह व्यर्थ जाता है. मान्यता है कि जब सात मिट्टी के बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखकर पकाए जाते हैं, तो सबसे ऊपर रखा बर्तन पहले पक जाता है — जो विज्ञान से परे एक रहस्य है.

महाप्रसाद को मंदिर के ‘आनंद बाजार’ में वितरित और बेचा जाता है, जहां हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी पंथ, जाति या समुदाय से हो, समान अधिकार से इसे प्राप्त कर सकता है. यह एक अनूठा उदाहरण है धार्मिक समानता और एकता का.

ऐसा माना जाता है कि सच्ची श्रद्धा से महाप्रसाद का सेवन करने से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं और भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इसीलिए कहा जाता है कि पुरी की यात्रा तब तक अधूरी है जब तक महाप्रसाद का सेवन न किया जाए.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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