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Navratri 2024 4th Day, Maa Kushmanda Vrat Katha In Hindi: नवरात्र के चौथे दिन आज पढ़ें मां कुष्‍मांडा की कथा

Updated at : 05 Oct 2024 2:01 PM (IST)
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Maa Kushmanda Vrat Katha In Hindi

Maa Kushmanda Vrat Katha In Hindi

Navratri 2024 4th Day: नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्‍मांडा की पूजा की जाती है. माता को प्रारंभिक स्वरूप और आदिशक्ति के रूप में मान्यता प्राप्त है. व्रत कथा के विषय में जानकारी प्राप्त करें.

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Navratri 2024 4th Day, Maa Kushmanda Vrat Katha In Hindi: नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्‍मांडा की पूजा का विशेष महत्व है. इस दिन श्रद्धालु विधिपूर्वक मां दुर्गा की आराधना करते हैं और उन्हें मिठाई, फल तथा भोग अर्पित करते हैं. मां को मालपुआ बहुत पसंद है, इसलिए पूजा में मालपुआ का समावेश करना आवश्यक है. माता को प्रारंभिक स्वरूप और आदिशक्ति के रूप में जाना जाता है. व्रत कथा के बारे में जानें.

मां कुष्‍मांडा की व्रत कथा


सनातन शास्त्रों में वर्णित है कि प्राचीन काल में त्रिदेव ने सृष्टि की रचना का संकल्प लिया. उस समय सम्पूर्ण ब्रह्मांड में घना अंधकार व्याप्त था. समस्त सृष्टि एकदम शांत थी, न कोई संगीत, न कोई ध्वनि, केवल एक गहरा सन्नाटा था. इस स्थिति में त्रिदेव ने जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा से सहायता की याचना की.

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जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा ने तुरंत ही ब्रह्मांड की रचना की. कहा जाता है कि मां कुष्मांडा ने अपनी हल्की मुस्कान से सृष्टि का निर्माण किया. मां के चेहरे पर फैली मुस्कान से सम्पूर्ण ब्रह्मांड प्रकाशमय हो गया. इस प्रकार अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना करने के कारण जगत जननी आदिशक्ति को मां कुष्मांडा के नाम से जाना जाता है. मां की महिमा अद्वितीय है.

मां का निवास स्थान सूर्य लोक है. शास्त्रों के अनुसार, मां कुष्मांडा सूर्य लोक में निवास करती हैं. ब्रह्मांड की सृष्टि करने वाली मां कुष्मांडा के मुखमंडल पर जो तेज है, वही सूर्य को प्रकाशवान बनाता है. मां सूर्य लोक के भीतर और बाहर हर स्थान पर निवास करने की क्षमता रखती हैं.

मां के मुख पर एक तेजोमय आभा प्रकट होती है, जिससे समस्त जगत का कल्याण होता है. उन्होंने सूर्य के समान कांतिमय तेज का आवरण धारण किया हुआ है. यह तेज केवल जगत जननी आदिशक्ति मां कुष्मांडा द्वारा ही संभव है. मां का आह्वान निम्नलिखित मंत्र से किया जाता है.

सुरासंपूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च.

दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता.

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:..’

शास्त्रों में निहित है कि पूजा के समय निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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