मधेपुरा के उदाकिशुनगंज धुएं में जल रहा युवाओं का भविष्य, स्मैक की गिरफ्त में नई पीढ़ी
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 31 May 2026 1:36 PM
एक सुनसान पड़े घर में स्मैक में इस्तेमाल होने वाले सामान पड़े मिले
Madhepura News: मधेपुरा के उदाकिशुनगंज में 300 रुपये की पुड़िया और बर्बाद होती जिंदगी. उदाकिशुनगंज में स्मैक का बढ़ता जाल बना परिवारों और समाज के लिए बड़ा खतरा
उदाकिशुनगंज से कौनैन बशीर की रिपोर्ट
Madhepura News: शिक्षा, रोजगार और बेहतर भविष्य के सपने देखने वाली युवा पीढ़ी आज नशे की खतरनाक गिरफ्त में फंसती नजर आ रही है. उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र में स्मैक, गांजा और कोडिनयुक्त कफ सिरप जैसे नशीले पदार्थों का बढ़ता प्रचलन अभिभावकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि आसानी से उपलब्ध हो रहे नशीले पदार्थ युवाओं को धीरे-धीरे अपराध, बीमारी और सामाजिक पतन की ओर धकेल रहे हैं.
गांव से बाजार तक फैल रहा नशे का नेटवर्क
उदाकिशुनगंज के ग्रामीण और शहरी इलाकों में स्मैक के सेवन और अवैध बिक्री की चर्चा आम हो चुकी है. स्थानीय लोगों के अनुसार कई सुनसान मकानों और ठिकानों पर चोरी-छिपे स्मैक का कारोबार चल रहा है. 300 से 400 रुपये में मिलने वाली एक पुड़िया युवाओं को तेजी से नशे की दुनिया में धकेल रही है. इसका असर पढ़ाई, रोजगार और पारिवारिक जीवन पर साफ दिखाई देने लगा है.
सूखे नशे की गिरफ्त में सबसे ज्यादा युवा
जानकारों का कहना है कि क्षेत्र में सूखा नशा तेजी से फैल रहा है. स्मैक, गांजा और कोडिनयुक्त कफ सिरप का सेवन करने वाले अधिकांश युवा हैं. कई मामलों में नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी की भी चर्चाएं होती रहती हैं. अधिक मुनाफे के लालच में कुछ युवा ही अपने साथियों को इस दलदल में धकेल रहे हैं.
अपराध और असुरक्षा का बढ़ता खतरा
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि नशे की लत केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं है. नशे की पूर्ति के लिए चोरी, झपटमारी और अन्य आपराधिक गतिविधियों का खतरा भी बढ़ जाता है. इससे समाज में असुरक्षा की भावना पैदा होती है और परिवार आर्थिक व मानसिक संकट में फंस जाते हैं.
चिकित्सकों ने दी गंभीर चेतावनी
चिकित्सक डॉ. पी. आलम के अनुसार स्मैक और अन्य सूखे नशे का लगातार सेवन युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है. इससे मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है और व्यक्ति गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकता है. उन्होंने युवाओं से नशामुक्ति केंद्रों की मदद लेने और समय रहते इस लत से बाहर निकलने की अपील की.
पुलिस का दावा, जारी है विशेष अभियान
एसडीपीओ अविनाश कुमार ने बताया कि नशे के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है. हाल के दिनों में स्मैक, शराब और कोडिनयुक्त कफ सिरप की बरामदगी हुई है तथा कई तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है. उन्होंने कहा कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए पुलिस के साथ-साथ समाज और परिवारों की भी सक्रिय भूमिका जरूरी है.
जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है. अभिभावकों की सतर्कता, सामाजिक जागरूकता, रोजगार के अवसर और नशामुक्ति अभियान ही युवाओं को इस खतरनाक रास्ते से वापस ला सकते हैं. यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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