श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर साध्वी मेरूदेवा भारती ने दिया ब्रह्मज्ञान का संदेश, 30 श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया ब्रह्मज्ञान

भगवत्कथा में जुटे लोगों की भीड़
सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन हुआ, जहाँ साध्वी मेरूदेवा भारती ने ब्रह्मज्ञान और अध्यात्म का महत्व समझाया. इस अवसर पर 30 श्रद्धालुओं ने ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर ईश्वर के दर्शन का अनुभव किया.
Bhagwat Katha: मधेपुरा के झलारी चौक स्थित न्यू आश्रम परिसर में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समापन श्रद्धा और भक्ति के माहौल में हुआ. कथा के सप्तम दिवस पर भागवताचार्या साध्वी मेरूदेवा भारती ने श्रद्धालुओं को ब्रह्मज्ञान, ध्यान और अध्यात्म का महत्व बताते हुए कहा कि वास्तविक ध्यान तब है, जब मनुष्य अपने भीतर परमात्मा की अनुभूति करता है.
उद्धव प्रसंग और रुक्मिणी विवाह का किया भावपूर्ण वर्णन
साध्वी मेरूदेवा भारती ने कथा के दौरान उद्धव जी की व्रज यात्रा तथा रुक्मिणी-श्रीकृष्ण परिणय प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया. उन्होंने इन प्रसंगों में छिपे आध्यात्मिक संदेशों को सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग श्रद्धा, समर्पण और गुरु कृपा से ही प्रशस्त होता है.
विज्ञान नहीं, अध्यात्म देता है जीवन में शांति
Bhagwat Katha: उन्होंने कहा कि विज्ञान ने मानव जीवन को अनेक सुविधाएं दी हैं, लेकिन आज भी समाज में तनाव, अशांति और आत्महत्या जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. विज्ञान मनुष्य को मंगल ग्रह तक पहुंचा सकता है, लेकिन जीवन में मंगल कैसे आए, इसका उत्तर केवल अध्यात्म के पास है. इसी कारण अध्यात्म को विज्ञानों का विज्ञान कहा गया है.
ब्रह्मज्ञान और साधना से आता है वास्तविक परिवर्तन
साध्वी ने कहा कि केवल प्रवचन सुन लेने से जीवन नहीं बदलता. जब व्यक्ति सुनी हुई बातों पर मनन करता है, उन्हें अपने जीवन में अपनाता है और पूर्ण गुरु की शरण में जाकर ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर नियमित ध्यान साधना करता है, तभी उसके जीवन में वास्तविक परिवर्तन आता है. उन्होंने उपनिषदों के वाक्य "आत्मा वा अरे श्रोतव्यो, मन्तव्यो, निदिध्यासितव्यः" का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले सुनना, फिर मनन करना और अंत में परमात्मा की अनुभूति करना ही अध्यात्म का वास्तविक मार्ग है.
पूर्ण गुरु के माध्यम से ही संभव है ईश्वर का साक्षात्कार
उन्होंने कहा कि जैसे देवी रुक्मिणी ब्राह्मण के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण तक पहुंचीं, उसी प्रकार पूर्ण सतगुरु के माध्यम से ही ईश्वर का साक्षात्कार संभव है. दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज के नेतृत्व में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान "मानव में क्रांति, विश्व में शांति" के उद्देश्य से ब्रह्मज्ञान का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहा है. उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर ब्रह्मतत्त्व की जागृति ही समाज और राष्ट्र के सकारात्मक परिवर्तन का आधार बन सकती है.
30 श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया ब्रह्मज्ञान
कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं के कल्याण और विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना की गई. संस्थान की ओर से बताया गया कि इस अवसर पर लगभग 30 श्रद्धालुओं ने पूर्ण गुरु की कृपा से ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर अपने अंतर्मन में ईश्वर के दर्शन का अनुभव किया. कथा समापन समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे.
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लेखक के बारे में
By कौनैन वशीर
कौनैन वशीर प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. वर्ष 2001 में अमर उजाला से पत्रकारिता की शुरुआत की. अभी उदाकिशनगंज (मधेपुरा) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.
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