टीएमसी की उल्टी गिनती शुरू! राज्यसभा सांसद ने अपनी ही पार्टी के टॉप लीडर्स को सुनायी खरी-खरी
Published by : Mithilesh Jha Updated At : 31 May 2026 10:35 AM
TMC Bleeds: तृणमूल कांग्रेस के एक राज्यसभा सांसद ने पार्टी नेतृत्व को कड़ी फटकार लगाते हुए दावा किया है कि टीएमसी कुछ ही दिनों में खत्म हो जायेगी. भ्रष्टाचार और सांगठनिक विफलता को लेकर सांसद के इस बयान ने बंगाल में सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.
खास बातें
TMC Bleeds: पश्चिम बंगाल की राजनीति में लगातार ‘भूकंप’ के झटके आ रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने अपनी ही पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ ऐसा धमाका किया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है. सांसद ने अत्यंत कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर मौजूदा हालात नहीं बदले, तो तृणमूल कांग्रेस अगले कुछ ही दिनों में इतिहास बन जायेगी. इसका अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जायेगा.
सांसद के तीखे बाणों से टीएमसी छलनी
हार के बाद शुरू हुई इस आंतरिक खींचतान ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा किया है, जहां से वापसी की राह कठिन दिख रही है. पार्टी के भीतर से उठ रही आवाज ने नेतृत्व के होश उड़ा दिये हैं. सांसद सुखेंदु शेखर ने अपने दावे के समर्थन में जो तर्क दिये हैं, उसे समझना जरूरी है.
- नेतृत्व की विफलता : सांसद ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि पार्टी का नेतृत्व जमीनी हकीकत से कट चुका है. चाटुकारों की फौज ने शीर्ष नेताओं को घेर लिया है, जिससे ईमानदार कार्यकर्ताओं की आवाज दब गयी है.
- भ्रष्टाचार का दीमक : सांसद ने कहा है कि भ्रष्टाचार ने पार्टी की जड़ों को इतना खोखला कर दिया है कि अब मरम्मत की कोई गुंजाइश नहीं बची है. जनता के बीच टीएमसी की छवि ‘चोर’ की बन चुकी है, जिसे बदलना नामुमकिन है.
- विनाश की भविष्यवाणी : सांसद ने साफ कहा- मैं जो देख रहा हूं, वह डरावना है. यह पार्टी अब कुछ ही दिनों की मेहमान है. संगठन ताश के पत्तों की तरह ढहने वाला है.
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पार्टी के भीतर ‘गृहयुद्ध’ जैसी स्थिति
यह बयान महज एक व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि टीएमसी के भीतर मचे उस महासंग्राम का हिस्सा है, जो अब खुलेआम सड़क पर आ गया है. सांसद का इशारा पार्टी के ‘अभिषेक ब्रिगेड’ और ‘ममता के वफादारों’ के बीच चल रही सत्ता की लड़ाई की ओर भी था. उनका मानना है कि इस गुटबाजी ने संगठन को लकवा मार दिया है.
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आरजी कर कांड का गहरा असर
माना जा रहा है कि आरजी कर मामले के बाद जिस तरह से पार्टी की किरकिरी हुई, उसने शांतनु सेन जैसे कई बौद्धिक नेताओं और सांसदों को बगावत के लिए मजबूर किया है. सांसद के इस बयान को इस संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है कि टीएमसी के कई बड़े चेहरे अब ‘डूबते जहाज’ से निकलकर सुरक्षित किनारा ढूंढ़ रहे हैं.
TMC Bleeds: नेतृत्व से चुप्पी तोड़ने की मांग
सांसद ने नेतृत्व को फटकार लगाते हुए कहा कि केवल कविताओं या सोशल मीडिया पोस्ट से पार्टी नहीं बचेगी. उन्होंने मांग की है कि नेतृत्व अपनी गलतियों को स्वीकार करे और उन लोगों को बाहर का रास्ता दिखाये, जिन्होंने पार्टी को इस हाल में पहुंचाया है. हालांकि, टीएमसी के आधिकारिक प्रवक्ताओं ने अभी तक इस पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन पार्टी के भीतर इस बयान ने डर का माहौल पैदा कर दिया है.
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क्या ढह जायेगा ममता बनर्जी का किला?
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि जब राज्यसभा स्तर का कोई नेता इतनी कड़ी बात कहता है, तो इसका मतलब है कि पार्टी के भीतर दरारें बहुत गहरी हो चुकी हैं. यदि आने वाले दिनों में कुछ और सांसद या विधायक इसी तरह के बयान देते हैं, तो पार्टी में बड़ी टूट से इनकार नहीं किया जा सकता.
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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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