ममता बनर्जी ने ‘गिरगिटी’ कविता से अपनों पर साधा निशाना, 20 सांसद और 50 विधायक छोड़ेंगे साथ?

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 28 May 2026 7:50 PM

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Mamata Banerjee Girgiti: बंगाल चुनाव 2026 के बाद टीएमसी में बगावत के बीच पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने ‘गिरगिटी’ कविता लिखकर बागी नेताओं पर हमला बोला है. दूसरी तरफ, बीजेपी सांसद सौमित्र खान ने 20 सांसदों और 50 विधायकों के पाला बदलने का दावा कर टीएमसी की टेंशन डबल कर दी है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

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Mamata Banerjee Girgiti: पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद शुरू हुआ अंतर्कलह आर-पार की जंग में तब्दील हो गया है. एक तरफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में इस्तीफों की झड़ी लगी है, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कविता के जरिये बागी तेवर दिखा रहे नेताओं को कड़ा संदेश दिया है.

फेसबुक पर ममता ने साझा की ‘गिरगिटी’

ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर ‘गिरगिटी’ (Chameleon) शीर्षक से एक कविता साझा की है, जिसे पार्टी के भीतर ‘रंग बदलने वाले’ नेताओं पर सीधा हमला माना जा रहा है. इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद सौमित्र खान के विस्फोटक दावे ने आग में घी का काम किया है. सौमित्र ने कहा है कि टीएमसी के 20 सांसद और 50 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं.

बगावती तेवर वाले नेताओं पर ममता का प्रहार

ममता बनर्जी ने अपनी कविता के जरिये उन नेताओं को आईना दिखाया है, जो पार्टी के मुश्किल दौर में साथ छोड़ रहे हैं या नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं.

  • रंग बदलने वालों से सावधान : कविता में ममता दी ने लिखा है कि गिरगिट तो केवल आजीविका के लिए रंग बदलता है, लेकिन कुछ लोग व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए कुछ ही क्षण में अपना चरित्र बदल लेते हैं.
  • कार्यकर्ताओं से गद्दारी का आरोप : टीएमसी सुप्रीमो ने उन नेताओं को आड़े हाथों लिया, जिन्होंने मुश्किल समय में जमीनी कार्यकर्ताओं को अकेला छोड़ दिया और अपनी सुख-सुविधाओं के लिए ‘आत्मसम्मान’ का सौदा कर लिया.
  • चेतावनी भरा अंत : कविता की अंतिम पंक्तियों में बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ने ‘समय के पहिये’ का जिक्र करते हुए बागियों को चेतावनी दी है कि उनके कर्मों का फल उन्हें जरूर मिलेगा और गद्दारों को उनकी असली कीमत समझ आयेगी.

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सौमित्र खान का महा-विस्फोट : क्या खत्म हो जायेगी टीएमसी?

बीजेपी सांसद सौमित्र खान ने दावा किया है कि टीएमसी का अस्तित्व अब खतरे में है. टीएमसी के 20 सांसद और 50 विधायक पार्टी से बेहद नाराज हैं और वे किसी भी वक्त पाला बदल सकते हैं. उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली से बीजेपी आलाकमान का इशारा मिल जाये, तो बंगाल में टीएमसी ताश के पत्तों की तरह ढह जायेगी.

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Mamata Banerjee Girgiti: इस्तीफों का सैलाब और बढ़ती नाराजगी

टीएमसी के भीतर केवल बाहरी दबाव नहीं, बल्कि आंतरिक विद्रोह भी चरम पर है. सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सभी सांगठनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है. सुशांत घोष, अरूप चक्रवर्ती और इंद्रनील सेन जैसे नेताओं ने भी पार्टी के कामकाज और ‘वीवीआईपी कल्चर’ पर गंभीर सवाल उठाये हैं. बागी नेताओं का कहना है कि राशन घोटाला, शिक्षक भर्ती और आरजी कर अस्पताल जैसे मामलों ने जनता के बीच पार्टी की छवि खराब की है, जिसे सुधारने में नेतृत्व विफल रहा है.

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टीएमसी का पलटवार- यह सिर्फ अफवाह

इतने बड़े संकट के बावजूद टीएमसी के आधिकारिक खेमे ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. पार्टी सांसद सौगत रॉय ने इसे बीजेपी का ‘माइंडगेम’ और दुष्प्रचार करार दिया है. उन्होंने कहा कि टीएमसी एकजुट है और किसी भी नेता के पाला बदलने की बात पूरी तरह बकवास है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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