भारत के इन जगहों पर होली खेलने पर है बैन, वजह सुनकर होंगे हैरान
Published by : Shaurya Punj Updated At : 03 Mar 2025 4:15 PM
Places where holi is not celebrated
Holi 2025: भारत में कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ होली का पर्व नहीं मनाया जाता. आज हम आपको इन स्थानों के बारे में जानकारी देने वाले हैं.
Holi 2025: रंगों का पर्व होली पूरे देश में अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है. यह पर्व हर व्यक्ति के मन में उमंग और उत्साह का संचार करता है. कहा जाता है कि होली के दिन शत्रु भी मित्र बन जाते हैं. बच्चे से लेकर वृद्ध तक सभी इस पर्व के रंगों में रंगे हुए नजर आते हैं. जहां एक ओर भारत के हर कोने में लोग होली का बेसब्री से इंतजार करते हैं, वहीं कुछ स्थान ऐसे भी हैं जहां इस त्योहार का कोई विशेष उत्साह नहीं होता, क्योंकि वहां होली का आयोजन नहीं किया जाता. आइए, इन स्थानों के बारे में जानकारी प्राप्त करें.
गुजरात के रामसन में होली पर प्रतिबंध
गुजरात के रामसन नामक स्थान पर पिछले 200 वर्षों से होली का पर्व नहीं मनाया जाता है. यहां के निवासियों का विश्वास है कि भगवान श्रीराम ने अपने जीवन में इस क्षेत्र का दौरा किया था, जिसके कारण इसे रामसन कहा जाता है, जिसे रामेश्वर के नाम से भी जाना जाता है. होली न मनाने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं. कहा जाता है कि 200 वर्ष पूर्व होलिका दहन के समय इस गांव में एक भयंकर आग लग गई थी, जिससे कई घर जलकर राख हो गए थे, जिसके बाद से यहां के लोगों ने होली मनाना बंद कर दिया. इसके अतिरिक्त, यह भी माना जाता है कि साधु संत इस गांव के निवासियों से किसी कारणवश नाराज हो गए थे और उन्होंने श्राप दिया था कि यदि इस गांव में होलिका दहन किया गया, तो पूरे गांव में आग लग जाएगी.
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झारखंड के दुर्गापुर गांव में नहीं मनाया जाता होली का पर्व
झारखंड के बोकारो जिले के कसमार प्रखंड स्थित दुर्गापुर गांव में होली का त्योहार नहीं मनाया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि होली के दिन राजा और रानी का निधन हो गया था. इस दुख के कारण ग्रामीण होली का उत्सव नहीं मनाते हैं और होली के रंगों को अशुभ मानते हैं. दुर्गा पहाड़ी के आसपास बसे आदिवासी, अल्पसंख्यक और महतो समुदाय के दुर्गापुर गांव में लगभग एक दर्जन टोले के करीब 10 हजार लोग निवास करते हैं. 300 वर्षों के बाद भी, इन लोगों में अपने राजा के प्रति गहरी श्रद्धा है, या दूसरे शब्दों में, अंधविश्वास के चलते ये लोग अब भी होली का आयोजन नहीं करते हैं.
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग के इस गांव में होली नहीं मनाते
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में दो गांव हैं, जहां होली का पर्व नहीं मनाया जाता. ये गांव खुरजान और क्विली के नाम से जाने जाते हैं. इन गांवों में पिछले 150 वर्षों से होली का आयोजन नहीं किया गया है. यहां के निवासियों का मानना है कि उनकी कुल देवी को शोर-शराबा पसंद नहीं है. इसलिए, वे यह मानते हैं कि यदि वे होली मनाएंगे, तो देवी उनसे नाराज हो जाएंगी, जिससे गांव में संकट आ सकता है.
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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