Diwali 2025: दिवाली की अगली सुबह करना ना भूलें ये उपाय, दूर हो सकती है दरिद्रता

दिवाली के अगले दिन सूप सूप बजाने से भागती है दरिद्रता
Diwali 2025 Upay: दिवाली के अगले दिन कुछ खास उपाय करने से घर से दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. सूप बजाना, झाड़ू से सफाई करना और सही मंत्रों का उच्चारण करने जैसी प्रथाएं समृद्धि और सुख-शांति लाने में मदद करती हैं. इसे करने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.
Diwali 2025: आज 20 अक्तूबर 2025 को दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है. दिवाली का त्योहार खुशियों, समृद्धि और धन का प्रतीक माना जाता है. इसी वजह से दिवाली के अगले दिन भी खास महत्व रखा गया है. इसे आमतौर पर “गोवर्धन पूजा” या “भाई दूज” से जोड़ा जाता है. परंपरा में एक और खास विधि है, जिसमें सूप से दरिद्रता (गरीबी) को दूर करने का उपाय किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि दिवाली के दिन घर में धन और सुख समृद्धि आती है, लेकिन अगले दिन यह प्रथा अपनाकर आर्थिक स्थिरता और नकारात्मकता से मुक्ति पाई जा सकती है.
दिवाली के अगले दिन सूप बजाने का महत्व
सूप आमतौर पर धान या अनाज छानने के लिए इस्तेमाल होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह सुख, समृद्धि और दरिद्रता को दूर करने का प्रतीक है. जैसे सूप अनाज को छानकर शुद्ध करता है, वैसे ही इसे घर में नकारात्मक ऊर्जा और गरीबी दूर करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है.
दिवाली के अगले दिन सूप बजाने की परंपरा
दिवाली के अगले दिन घर से दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए सूप बजाने की पुरानी परंपरा है. सुबह करीब 4 बजे महिलाएं उठती हैं और टूटी हुई सूप लेकर पूरे घर में घूमती हैं. सूप बजाते समय बोलना होता है – “बैठ लक्ष्मी, भाग दरिद्रता”. इसे घर के हर कोने में बजाया जाता है ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे.
इसके अलावा, इस दिन किसी को पैसे न देना और किसी से पैसे न लेना शुभ माना जाता है. एक और उपाय यह है कि महिलाएं घर की सफाई करके झाड़ू से निकला कचरा सूप में इकट्ठा करती हैं और घर से दूर फेंक देती हैं. इसे करते समय भी कहा जाता है – “लक्ष्मी आओ, दरिद्र-दरिद्र जाओ”. इस रीति-रिवाज से घर में सुख, समृद्धि और धन की वृद्धि होती है और परिवार में खुशहाली बनी र���ती है.
धार्मिक और मानसिक लाभ
सूप से दरिद्रता भगाने की प्रथा केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है. इससे मानसिक और आध्यात्मिक शांति भी मिलती है. घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और परिवार के सदस्य अधिक आत्मविश्वासी महसूस करते हैं. यह संकेत देता है कि परिवार मिलकर हर कठिनाई और गरीबी से निपट सकता है.
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By Shaurya Punj
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