आज दिखेगा ब्लड मून, होली से पहले पूर्ण चंद्रग्रहण का अद्भुत नजारा न चूकें

आज दिखेगा रक्त चंद्रमा
Blood Moon 2026: तीन मार्च को दिखेगा दुर्लभ ब्लड मून, जानिए कब, कैसे और कहां देखें आखिरी पूर्ण चंद्रग्रहण, क्यों लाल होता है चंद्रमा और क्या है इसका वैज्ञानिक महत्व.
Blood Moon 2026: आज 3 मार्च 2026, मंगलवार का दिन एक अनोखी खगोलीय घटना का साक्षी बनने जा रहा है. साल 2026 का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण आज रात दिखाई देगा, ठीक होली के रंगों से एक दिन पहले यानी 4 मार्च से पहले. यानी 3 मार्च की रात आकाश में एक अद्भुत खगोलीय घटना घटित होने जा रही है. चंद्रमा सीधे पृथ्वी की छाया से गुजरेगा और पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा. खास बात यह है कि इस बार ग्रहण एक सुविधाजनक समय पर लगेगा, इसलिए इसे देखने के लिए न तो अलार्म लगाने की जरूरत है और न ही आधी रात को नींद तोड़ने की. ऑस्ट्रेलिया और ऑटेरोआ (न्यूजीलैंड) इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए सबसे उपयुक्त स्थानों में होंगे.
कैसे शुरू होगा यह खगोलीय नजारा?
मंगलवार शाम को पूर्ण और चमकीले चंद्रमा पर धीरे-धीरे पृथ्वी की छाया पड़नी शुरू होगी. शुरुआत में यह बदलाव हल्का सा लगेगा, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतेगा, चंद्रमा का एक हिस्सा अंधकार में डूबता जाएगा. इस चरण को आंशिक ग्रहण कहा जाता है.
जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश कर जाएगा, तब वह लाल रंग की आभा में चमकने लगेगा. खगोलविद इस क्षण को “पूर्णता” कहते हैं. यही वह समय होता है जब चंद्रमा का रूप सबसे आकर्षक और रहस्यमय दिखाई देता है.
क्यों कहा जाता है ‘रक्त चंद्रमा’?
पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का लाल दिखाई देना लोगों के मन में जिज्ञासा और आश्चर्य पैदा करता है. इसी वजह से इसे “रक्त चंद्रमा” या “ब्लड मून” कहा जाता है. इतिहास में कई संस्कृतियों ने इस लालिमा को अशुभ संकेत के रूप में देखा, लेकिन आधुनिक विज्ञान इसके पीछे का स्पष्ट कारण बताता है.
जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती. पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को मोड़कर चंद्रमा तक पहुंचाता है. इस प्रक्रिया में नीली रोशनी बिखर जाती है और केवल लाल रंग की किरणें चंद्रमा तक पहुंच पाती हैं. इसी कारण चंद्रमा लाल दिखाई देता है.
चंद्र ग्रहण कब और कितनी देर तक रहेगा?
चंद्र ग्रहण एक धीमी गति से घटित होने वाली घटना है, जो कई घंटों तक चलती है. इस बार चंद्रमा को पृथ्वी की छाया में पूरी तरह प्रवेश करने में लगभग 75 मिनट लगेंगे. इसके बाद करीब एक घंटे तक पूर्ण ग्रहण रहेगा, जब चंद्रमा पूरी तरह लाल दिखाई देगा. फिर अगले 75 मिनट में चंद्रमा धीरे-धीरे छाया से बाहर निकल आएगा और अपनी सामान्य चमक में लौट आएगा.
चूंकि पृथ्वी की छाया चंद्रमा से काफी बड़ी होती है, इसलिए पृथ्वी के रात्रि भाग में रहने वाले सभी लोग इस घटना को लगभग एक ही समय पर देख सकेंगे. केवल स्थानीय समय के अनुसार देखने का समय अलग-अलग होगा.
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में कैसा रहेगा दृश्य?
पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में ग्रहण की शुरुआत उस समय होगी जब चंद्रमा क्षितिज के नीचे होगा. जैसे-जैसे चंद्रमा ऊपर उठेगा, वह आंशिक रूप से छाया में आ चुका होगा. गोधूलि की हल्की रोशनी में इसे देखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, क्योंकि चंद्रमा सूर्यास्त के समय उगेगा.
हालांकि थोड़े धैर्य के साथ इंतजार करने पर दृश्य स्पष्ट होता जाएगा. जैसे-जैसे अंधेरा गहराएगा, लालिमा लिए चंद्रमा पूर्वी आकाश में साफ दिखाई देने लगेगा.
ऑस्ट्रेलिया के अन्य हिस्सों में ग्रहण थोड़ी देर से शुरू होगा. वहीं ऑटेरोआ (न्यूजीलैंड) में स्थानीय समयानुसार रात 10 बजकर 50 मिनट पर ग्रहण की शुरुआत होगी. यहां आसमान पूरी तरह अंधेरा होगा और चंद्रमा उत्तर दिशा में काफी ऊंचाई पर रहेगा, जिससे यह दृश्य बेहद शानदार दिखाई देगा.
चंद्रमा लाल क्यों हो जाता है?
जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है, तो शुरुआत में वह काला या धुंधला दिखाई देता है. लेकिन जैसे ही वह पूरी तरह छाया में समा जाता है, पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को मोड़कर चंद्रमा तक पहुंचाता है.
वायुमंडल में मौजूद धूल, बादल और कण इस लालिमा की तीव्रता को प्रभावित करते हैं. यदि वातावरण अधिक धूल भरा हो, तो चंद्रमा गहरा लाल दिखाई देगा. यदि वातावरण साफ और पारदर्शी हो, तो चंद्रमा हल्के नारंगी रंग में चमक सकता है.
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इस पूरी प्रक्रिया को ‘रेले प्रकीर्णन’ कहा जाता है. यही कारण है कि दिन में आकाश नीला दिखाई देता है, क्योंकि नीली रोशनी अधिक बिखरती है और लाल रोशनी लंबी दूरी तय कर पाती है.
हर बार पूर्ण चंद्र ग्रहण क्यों नहीं होता?
हालांकि चंद्रमा हर महीने पृथ्वी की परिक्रमा करता है, फिर भी हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं लगता. इसका कारण यह है कि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से थोड़ी झुकी हुई है. इसलिए सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा हमेशा एक सीध में नहीं आते.
जब ये तीनों पिंड बिल्कुल सीध में आ जाते हैं, तभी पूर्ण चंद्र ग्रहण संभव होता है. अन्य समय में चंद्रमा केवल पृथ्वी की बाहरी छाया यानी उपछाया से गुजरता है, जिससे हल्का सा धुंधलापन आता है, जिसे सामान्य आंखों से पहचानना मुश्किल होता है.
2029 तक आखिरी मौका
खगोलविदों के अनुसार, यह पूर्ण चंद्र ग्रहण 2029 तक “रक्त चंद्रमा” देखने का आखिरी अवसर होगा. 2027 में होने वाले तीन ग्रहण केवल उपछाया ग्रहण होंगे, जिन्हें महसूस करना लगभग असंभव होगा. इसलिए इस बार का ग्रहण विशेष महत्व रखता है.
एक अद्भुत अनुभव
चंद्र ग्रहण हमें यह याद दिलाता है कि हम एक विशाल और रहस्यमय ब्रह्मांड का हिस्सा हैं. इसे देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती—सिर्फ साफ आसमान और थोड़े धैर्य की जरूरत है.
जब चंद्रमा लाल आभा में चमके, तो उस क्षण को जरूर महसूस करें. यह न केवल एक वैज्ञानिक घटना है, बल्कि प्रकृति का एक मनमोहक दृश्य भी है, जिसे हर किसी को कम से कम एक बार अवश्य देखना चाहिए.
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लेखक के बारे में
By Shaurya Punj
मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.
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