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आज है भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

Updated at : 06 Mar 2026 7:48 AM (IST)
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Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 2026

Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी 6 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। जानें व्रत का समय, चंद्रोदय का समय और सरल पूजा विधि।

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Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. यह दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से गणेश जी की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है. जो लोग नियमित रूप से संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखते हैं, उनके कार्यों में आने वाली परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है.

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का समय

इस साल भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत शुक्रवार 6 मार्च 2026 को रखा जा रहा है. चतुर्थी तिथि का आरंभ शाम 7 बजकर 53 मिनट से होगा. इसके बाद यह तिथि अगले दिन यानी शनिवार 7 मार्च को शाम 7 बजकर 17 मिनट तक रहेगी. संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रमा का विशेष महत्व होता है, इसलिए व्रत का पारण चंद्र दर्शन के बाद ही किया जाता है.

आज रखा जाएगा संकष्टी चतुर्थी व्रत

संकष्टी चतुर्थी का व्रत हमेशा उस दिन रखा जाता है जिस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान चंद्रमा का उदय होता है. इसी नियम के अनुसार वर्ष 2026 में भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत 6 मार्च, शुक्रवार को रखा जाएगा. इस दिन श्रद्धालु पूरे दिन व्रत रखते हैं और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं.

6 मार्च को चंद्रोदय का समय

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही व्रत पूरा माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार 6 मार्च को चंद्रमा का उदय रात 9 बजकर 14 मिनट पर होगा. इस समय चंद्रमा के दर्शन करके पूजा करने के बाद व्रत का पारण किया जा सकता है.

संकष्टी चतुर्थी व्रत की पूजा विधि

  • इस व्रत को करने की विधि बहुत सरल मानी जाती है.
  • सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. घर के मंदिर या पूजा स्थान में गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
  • पूजा के दौरान भगवान गणेश को दूर्वा घास, लाल फूल, मोदक या लड्डू अर्पित करें. इसके बाद गणेश मंत्र, गणेश चालीसा या गणपति स्तोत्र का पाठ करें. दिन भर श्रद्धा और संयम के साथ व्रत रखें.
  • शाम के समय जब चंद्रमा दिखाई दे, तब दीपक जलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें. इसके बाद भगवान गणेश की पूजा करें और उनसे अपने जीवन की सभी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें. चंद्र दर्शन और पूजा के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है.
  • धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त श्रद्धा और नियम के साथ भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखते हैं, उनके जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं और गणपति बप्पा की कृपा से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है.
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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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