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Dhanteras 2025 Laxmi Mata Ki Aarti : आज धनतेरस पर लक्ष्मी नारायण योग, लक्ष्मी मां की आरती करने से मिलेगा ये शुभफल

Updated at : 11 Oct 2025 12:27 PM (IST)
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Dhanteras 2024 Laxmi Mata Ki Aarti

Dhanteras 2024 Laxmi Mata Ki Aarti

Dhanteras 2025 Laxmi Mata Ki Aarti: इस साल 18 अक्टूबर 2025 को, पूरे भारत में धनतेरस का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. यह दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए विशेष रूप से समर्पित है. मान्यता है कि धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि ने समुद्र मंथन के दौरान अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे.

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Dhanteras 2025 Laxmi Mata Ki Aarti: इस साल 18 अक्तूबर 2025 को, सम्पूर्ण भारत में धनतेरस का उत्सव मनाया जा रहा है. यह दिन भगवान धन्वंतरि की आराधना के लिए समर्पित है. मान्यता है कि धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि ने समुद्र मंथन के समय अमृत का कलश लेकर अवतार किया था.

धनतेरस पूजा का महत्व

इस वर्ष धनतेरस पूजा में प्रदोष काल में पूजा करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. धनतेरस की पूजा में माता लक्ष्मी जी की आरती का समावेश अवश्य करना चाहिए. यहां धनतेरस आरती के बोल देखें.

बन रहा है विशेष संयोग

इस बार धनतेरस पर ज्योतिषीय गणना के अनुसार 100 वर्षों के बाद एक विशेष संयोग उत्पन्न हो रहा है. इस अवसर पर त्रिग्रही योग, त्रिपुष्कर योग, इंद्र योग, लक्ष्मी नारायण योग और शश महापुरुष राजयोग सहित कुल पांच शुभ संयोगों का निर्माण हो रहा है.

Dhanteras 2024 Dhanvantari Bhagwan Ki Aarti: आज धनतेरस पर करें धन्वंतरि देव की आरती की पाठ, धन की नहीं होगी कमी

लक्ष्मी माता की आरती (Laxmi Mata Ki Aarti)

ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता.
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता, मैय्या तुम ही जग माता.
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता, मैय्या सुख संपत्ति पाता.
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता, मैय्या तुम ही शुभ दाता.
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता, मैय्या सब सद्गुण आता.
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता, मैय्या वस्त्र न कोई पाता.
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता, मैय्या क्षीरगदधि की जाता.
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता, मैय्या जो कोई जन गाता.
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
सब बोलो लक्ष्मी माता की जय, लक्ष्मी नारायण की जय.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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