ईरान के सर्वोच्च नेता का दावा: समझौते के लिए बेताब थे ट्रंप, लगाया हर तरह का दबाव

Edited by Amitabh Kumar
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डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई (गोल घेरे में)

अमेरिका-ईरान डील पर पहली बार रिएक्शन देते हुए ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने कहा कि उन्होंने इस समझौते को मंजूरी दी है. उन्होंने बताया कि ईरानी अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि देश के हितों और ‘रेजिस्टेंस फ्रंट’ के अधिकारों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी, तभी उन्होंने इसकी अनुमति दी.

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अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने के एक दिन बाद ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि ट्रंप इस समझौते को लेकर बहुत ही बेताब नजर आ रहे थे. इस डील को कराने के लिए उन्होंने हर तरह का दबाव और प्रभाव इस्तेमाल किया. मोजतबा खामेनेई ने कहा कि शुरुआत में उन्होंने सिद्धांत के तौर पर इस समझौते का विरोध किया था. हालांकि बाद में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्यों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि देश के हितों को पूरी तरह से ध्यान में रखा जाएगा.

खामेनेई ने कहा कि ईरानी अधिकारियों ने नेक इरादे और देश की चिंता को ध्यान में रखते हुए इस समझौते के लिए काफी मेहनत की. 18 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन कई महीनों से जारी तनाव को खत्म करने के लिए आगे बढ़े. दोनों ने बातचीत का रास्ता खोलने के उद्देश्य से एक समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए. इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी वार्ताकार मोहम्मद बाकेर कालीबाफ ने दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद दोनों नेताओं ने इसे वर्चुअल तरीके से मंजूरी दी.

ईरान अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा

खामेनेई के इस लिखित बयान से समझौते को लेकर ईरान के भीतर हुई चर्चाओं की झलक भी मिली. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि अगर भविष्य में अमेरिका की ओर से कोई ऐसी मांग रखी जाती है जो ईरान के हितों के खिलाफ या जरूरत से ज्यादा हो, तो तेहरान उसे स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि पेजेशकियन ने स्पष्ट किया था कि तेहरान अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगा.

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समझौते का समर्थन करते हुए भी मोजतबा खामेनेई ने साफ किया कि भविष्य में अमेरिका के साथ आमने-सामने होने वाली बातचीत को अमेरिकी रुख की स्वीकृति नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बातचीत का मतलब यह नहीं है कि ईरान अमेरिका की बातों से सहमत है. उनके मुताबिक, बातचीत केवल अपने हितों की रक्षा और मुद्दों के समाधान के लिए होगी, न कि किसी दबाव के आगे झुकने के लिए. 

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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