पितृ पक्ष 24 से, एक नजर डालें कुछ प्रमुख तिथि पर

Published at :20 Sep 2018 2:13 PM (IST)
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पितृ पक्ष 24 से,  एक नजर डालें कुछ प्रमुख तिथि पर

भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक की तिथि को श्राद्ध पक्ष, पितृ पक्ष या महालय कहा जाता है. इस अवधि में पितरों का तर्पण, पिंड दान व श्राद्ध किया जाता है. इस वर्ष यह सोमवार, 24 सितंबर से मंगलवार, नौ अक्तूबर तक रहेगा. जिस तिथि को पितरों का परलोक गमन या दाह संस्कार हुआ हो […]

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भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक की तिथि को श्राद्ध पक्ष, पितृ पक्ष या महालय कहा जाता है. इस अवधि में पितरों का तर्पण, पिंड दान व श्राद्ध किया जाता है. इस वर्ष यह सोमवार, 24 सितंबर से मंगलवार, नौ अक्तूबर तक रहेगा. जिस तिथि को पितरों का परलोक गमन या दाह संस्कार हुआ हो श्राद्ध पक्ष में उस तिथि को ही पितर का श्राद्ध किया जाना चाहिए. वैसे तो प्रत्येक मास की अमावस्या के मध्याह्न में पितरों के निमित्त तर्पण किया जाता है, किंतु पितृ पक्ष यानी आश्विन मास में किया गया श्राद्ध तर्पण विशेष प्रभावकारी माना गया है.

मान्यता है कि पितृ पक्ष में पितर (पूर्वज) अपने वंशज के द्वार पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक तर्पण के लिए खड़े रहते हैं. अत: हमें सामर्थ्य के अनुसार पितरों का तर्पण और श्राद्ध जरूर करना चाहिए. यदि ऐसा करने पर पितर असंतुष्ट हो जाते हैं.

महालया की शुरुआत :
जिस तिथि को पूर्वज ने देह त्याग किया हो उसी तिथि को उनका श्राद्ध व तर्पण किया जाना चाहिए. इसलिए पूर्णिमा तिथि वाले का तर्पण 24 सितंबर को होगा. क्योंकि श्राद्ध एवं तर्पण कार्य मध्याह्न काल में ही करना चाहिए. 24 सितंबर की प्रात: 6:33 बजे से पूर्णिमा तिथि शुरू हो रही है. जो 25 सितंबर को सुबह 7:41 बजे तक ही रहेगा. इसलिए हमें मध्याह्न व्यापणी पूर्णिमा तिथि साेमवार 24 सितंबर को ही प्राप्त हो रही है. इस कारण पूर्णिमा तिथि वाले का तर्पण और महालया की शुरुआत (पितृ पक्ष) 24 सितंबर से ही हो जायेगी.

एक नजर में

प्रतिपदा श्राद्ध 25 सितंबर

द्वितीया श्राद्ध 26 सितंबर

तृतीया श्राद्ध 27 सितंबर

चतुर्थी श्राद्ध 28 सितंबर

पंचमी श्राद्ध 29 सितंबर

षष्ठी श्राद्ध 30 सितंबर

सप्तमी श्राद्ध एक अक्तूबर

अष्टमी श्राद्ध दो अक्तूबर

नवमी श्राद्ध तीन अक्तूबर

दसवीं श्राद्ध चार अक्तूबर

एकादशी श्राद्ध पांच अक्तूबर

द्वादशी व त्रयोदशी श्राद्ध छह अक्तूबर

चतुर्दशी सात अक्तूबर

सर्वपैत्री पितृ विसर्जन व महालया समाप्त आठ अक्तूबर

दैहित्र कर्तृक मातामह श्राद्ध नौ अक्तूबर

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