शुरू होने वाला है अधिकमास, 33 दिनों तक करें लक्ष्मी-नारायण की पूजा

अधिक मास में करें ये सारे उपाय
Adhikmaas 2026: आने वाले 17 मई से शुरू हो रहा अधिकमास भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. इस दौरान किए गए उपाय धन, सुख और समृद्धि दिला सकते हैं.
Adhikmaas 2026: भारतीय पंचांग और वैदिक ज्योतिष में अधिकमास का विशेष महत्व माना गया है. इसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस चंद्र मास में सूर्य किसी भी राशि में प्रवेश नहीं करता, यानी संक्रांति नहीं होती, वह महीना अधिकमास कहलाता है. यह दुर्लभ संयोग लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है. वर्ष 2026 में यह अधिकमास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा. धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है.
क्यों कहलाता है पुरुषोत्तम मास
पौराणिक कथाओं के अनुसार मलमास को कोई देवता स्वामी के रूप में स्वीकार नहीं कर रहा था, जिसके कारण इसे अशुभ माना जाने लगा. तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम “पुरुषोत्तम मास” दिया और इसे अत्यंत पवित्र बना दिया. तभी से यह महीना भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. मान्यता है कि इस अवधि में सच्चे मन से पूजा करने पर आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है.
आर्थिक समृद्धि के लिए करें ये 7 उपाय
तुलसी पूजा और दीपदान
प्रतिदिन शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
श्री सूक्त का पाठ
धन और समृद्धि की प्राप्ति के लिए रोजाना श्री सूक्त का पाठ करना शुभ माना गया है. इससे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है.
सफेद वस्तुओं का दान
चावल, दूध, चीनी, सफेद वस्त्र और घी का दान करने से आर्थिक संकट कम होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है.
कमल पुष्प अर्पित करें
शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी को कमल का फूल चढ़ाने से दरिद्रता दूर होने की मान्यता है.
सात्विक जीवनशैली अपनाएं
इस पूरे महीने तामसिक भोजन, क्रोध और व्यसनों से दूर रहें. मन की शुद्धता ही मां लक्ष्मी को आकर्षित करती है.
गीता पाठ करें
प्रतिदिन श्रीमद्भगवद्गीता के किसी एक अध्याय का पाठ करने से मानसिक शांति और करियर में स्थिरता मिलती है.
इन कार्यों से करें परहेज
अधिकमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण और नए व्यापार की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्यों को वर्जित माना गया है.
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लेखक के बारे में
By शौर्य पुंज
मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.
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