कुंडली के बारह भाव बताते हैं कर्म क्षेत्र

Published at :16 Dec 2017 7:50 AM (IST)
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कुंडली के बारह भाव बताते हैं कर्म क्षेत्र

पीएन चौबे (ज्योतिषविद्) इन दिनों प्रतियोगी परीक्षाओं में या नौकरी की दौड़ में खुद को आगे रखने की इतनी आपाधापी है कि कुछेक को सफलता मिलती है, तो कई लोग अवसाद में चले जाते हैं. लेकिन यह समझना जरूरी है कि कोई चीज आप नहीं पा रहे हैं, तो वह आपके लिए किसी-न-किसी रूप में […]

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पीएन चौबे (ज्योतिषविद्)

इन दिनों प्रतियोगी परीक्षाओं में या नौकरी की दौड़ में खुद को आगे रखने की इतनी आपाधापी है कि कुछेक को सफलता मिलती है, तो कई लोग अवसाद में चले जाते हैं. लेकिन यह समझना जरूरी है कि कोई चीज आप नहीं पा रहे हैं, तो वह आपके लिए किसी-न-किसी रूप में अतिश्रेष्ठ है, क्योंकि ईश्वर जो भी देता है, उसके केंद्र में स्वयं आप हैं.

हर पायी हुई चीज आपके किये खुद के कर्मों का ही विस्तार है. ज्योतिषशास्त्र इसका विश्लेषण करता है कि आपकी सफलता की सीमाएं किस क्षेत्र में हैं एवं कहां तक सुनिश्चित है. हर कोई डॉक्टर, इंजीनियर या प्रशासनिक सेवा के लिए प्रतियोगिता में शामिल होता है, मगर आप किस में सफल होंगे, इसका संकेत कुंडली के 12 भाव स्पष्ट रूप से देते हैं. 12 भावों में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम एवं दशम् केंद्र स्थान है, वहीं पंचम एवं नवम् भाव त्रिकोण है.

केंद्र स्थान में दशम् भाव सर्वाधिक बली है, तो त्रिकोण में नवम् भाव बली है, जो क्रमश: कर्म एवं भाग्य को निरुपित करते हैं. प्रथम भाव स्वयं का, द्धितीय भाव धन एवं विद्या का, वहीं पंचम भाव व्यावसायिक शिक्षा का. ग्रह नौ हैं, जिनमें सूर्य एवं गुरु राजकृपा कारक ग्रह हैं, शनि न्याय, राजनीतिक शक्ति, तो राहू कूटनीति के कारक ग्रह हैं. च्रंद मन के कारक ग्रह हैं.

इन्हीं ग्रहों की विभिन्न भावों में युति दृष्टि इनके बल हर जातक को अलग-अलग विभागों में विभिन्न पर लेकर जाते हैं. महत्वपूर्ण योगों में पंच महापुरुष योग, गजकेशरी योग, बुधादित्य योग, विपरीत राजयोग, नीच भंग राज योग, धर्म कर्माधिप योग, केंद्र त्रिकोण योग अति महत्व के हैं. उच्च पद पर जाने के लिए कर्म भाव एवं भाग्य भाव के स्वामी बली हों, एक साथ दृष्टि युति करे अथवा स्थान परिवर्तन करे एवं कम-से-कम दो या तीन ग्रह उच्च के हों एवं शुभ हो. कर्म स्थान में बली सूर्य एवं गुरु उच्च पद देते हैं, वहीं चंद्रमा धनवान बनाते हैं.

मंगल पुलिस सेवा, तो बुध गणित के क्षेत्र- व्यापार, बैंकिंग सेवा आदि में ले जाते हैं. शुक्र कला, मकान, भवन आदि से लाभ कराता है, तो शनि उच्च होकर शासक, मंत्री या न्यायाधीश बना देता है. इसी प्रकार कर्म स्थान में यदि मेष राशि हो, तो पुलिस, इंजीनियर या सर्जन बनाते हैं, तो वृष राशि गले का डॉक्टर, गायक या प्रचारक बना देता है. मिथुन लेखाकार, पत्रकार, विश्लेषक, लेखक आदि बनाते हैं. जबकि कर्क राशि लोगों से मिलने की राशि है, जो जीव विज्ञान कृषि एवं चिकित्सा के क्षेत्र में ले जाता है. दशम भाव में सिंह राशि उच्च पदों पर जैसे- नेता, वन अधिकारी, फिल्म आदि में ले जाते हैं.

ग्रहों के अनुसार मंगल का प्रभाव पुलिस सेवा, बुध का प्रभाव लेखा सेवा, शनि का प्रभाव रेल सेवा अथवा न्यायिक सेवा, गुरु की दृष्टि वन सेवा में जाने का संकेत देते हैं. लेकिन ये सब मात्र संकेत हैं, इसलिए व्यापक संभावनाओं से विमुख नहीं होना चाहिए.

कुछ योग जैसे केमद्रुम आदि योग को न्यून या भंग भी कर देते हैं. आचार्य मेत्रेश्वर ने इन योगों को फलित होने के लिए चार बातें अवश्य बतायी हैं, जिनमें ईमानदारी, अहिंसा, उपेक्षितों के प्रति दया, करुणा एवं ईश्वर भक्ति में पूर्ण समर्पण प्रमुख हैं.

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