ट्रांसजेंडर व्यक्ति संशोधन बिल में ऐसा क्या है, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ जाता है?

Updated at : 24 Mar 2026 5:36 PM (IST)
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Transgender Persons

ट्रांसजेंडर व्यक्ति

Transgender Persons Amendment Bill 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकार बनाम भारत संघ के केस में यह कहा था कि हर किसी को गरिमा से जीने और अपना जेंडर तय करने का अधिकार है. अगर कोई व्यक्ति यह कहता है कि वह ट्रांसजेंडर है, तो उसे माना जाना चाहिए. 13 मार्च को सरकार ने संसद में एक बिल पेश किया, जो यह कहता है कि अब सिर्फ किसी व्यक्ति के कह देने भर से वह ट्रांसजेंडर नहीं हो जाएगा, उसे मेडिकल जांच करानी होगी, तभी उसे ट्रांसजेंडर का सर्टिफिकेट मिलेगा.

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Transgender Persons Amendment Bill 2026 : विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट लिखा और उसमें उन्होंने यह बताया कि वे ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से संबंधित संशोधन विधेयक का विरोध करेंगे. उन्होंने कहा कि यह बिल ट्रांसजेडर के संवैधानिक अधिकारों और उनकी पहचान पर हमला है, इसलिए कांग्रेस इस विधेयक का विरोध करेगी. राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा है कि इस बिल में किए गए प्रावधान ट्रांसजेंडर्स को अमानवीय परीक्षाओं से गुजरने पर मजबूर करते हैं, इसलिए वे इस बिल के विरोध में खड़े होंगे.

ट्रांसजेंडर बिल में क्या है?

ट्रांसजेंडर की पहचान2019 का कानूननया संशोधन
पहचान का अधिकारखुद तय कर सकते थेहटाया जा रहा है
सर्टिफिकेट प्रक्रियाDM को सीधे आवेदनमेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद DM के पास आवेदन
मेडिकल जांचजरूरी नहींजरूरी
परिभाषाव्यापक सीमित

केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने 13 मार्च को ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक संसद में पेश किया है. अभी यह बिल संसद से पारित नहीं हुआ है, लेकिन ट्रांसजेंडर इस बिल का विरोध कर रहे हैं. विधेयक में ट्रांसजेंडर की पहचान सुनिश्चित करने के लिए कुछ व्यवस्थाएं की गई है, जो 2019 के ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम से अलग हैं. 2019 के एक्ट में यह प्रावधान था कि कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से खुद को ट्रांसजेंडर घोषित कर सकता था और उसके बाद उसे डीएम से प्रमाणपत्र मिल जाता है. अब यह व्यवस्था समाप्त हो गई है और मेडिकल टेस्ट कराना जरूरी कर दिया गया है. मेडिकल टेस्ट के बाद ही डीएम किसी को ट्रांसजेंडर का सर्टिफिकेट दे पाएंगे. साथ ही जबरन किसी को ट्रांसजेंडर बनाने पर सजा का प्रावधान किया गया है. साथ ही संशोधन विधेयक में यह भी बताया गया है कि कौन लोग ट्रांसजेंडर हो सकते हैं, इसमें अपनी मर्जी शामिल नहीं होगी, इस वजह से कई लोग ट्रांसजेंडर की श्रेणी से हटाए जा सकते हैं. इसी वजह से ट्रांसजेंडर इस संशोधन विधेयक का विरोध कर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर को दिया है अपनी पहचान सुनिश्चित करने का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने नालसा बनाम भारत संघ (2014) (NALSA v Union of India) (2014) के केस में यह फैसला सुनाया था कि खुद की पहचान मौलिक अधिकार है. कोई भी व्यक्ति यह तय कर सकता है कि वह पुरुष है, महिला है या फिर ट्रांसजेंडर है. इसके लिए किसी मेडिकल जांच की जरूरत नहीं पड़ती थी. सरकार अब जो बिल लेकर आई है उसमें मेडिकल जांच को अनिवार्य बना दिया गया है, जो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है. कोर्ट ने यह कहा था कि हर किसी को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है, लेकिन विधेयक में मेडिकल जांच की बात आ गई है, जो इसे सरकारी प्रक्रिया बना रहा है, जो ट्रांसजेडर्स के लािए परेशानी का सबब बन रहा है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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