भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने वाले नेता बने पीएम मोदी, 2001 में शुरू हुआ था सफर
पीएम मोदी
PM Narendra Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने वाले नेता बन गए हैं. उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के तौर पर सबसे लंबे समय तक यानी लगभग 24 साल 5 महीने तक सरकार चलाई है और अभी भी वे प्रधानमंत्री हैं. पीएम मोदी ने सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग को सरकार चलाने के मामले में पीछे छोड़ दिया है.
PM Narendra Modi : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार 22 मार्च को एक्स पर एक पोस्ट लिखा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सबसे सबसे लंबे समय तक सरकार चलाने वाले मुखिया का रिकाॅर्ड बनाने के लिए उन्हें बधाई दिया. राजनाथ सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि देश और उसके लोगों के प्रति पीएम मोदी की सच्ची लगन साफ दिखती है. गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर उनके पक्के कमिटमेंट से लेकर प्रधानमंत्री के तौर पर उनके डेडिकेटेड लीडरशिप तक, उनका जीवन सेवा का एक लगातार सफर रहा है.
पवन कुमार चामलिंग का रिकाॅर्ड तोड़ा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग का रिकाॅर्ड तोड़ दिया है. चामलिंग ने सरकार के मुखिया के रूप में 8,930 दिन तक शासन किया था, जबकि नरेंद्र मोदी ने उनके रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है. नरेंद्र मोदी ने सरकार के मुखिया के तौर पर 8,931 दिनों तक पब्लिक ऑफिस में गुजार दिया है. राजनाथ सिंह ने अपने पोस्ट में लिखा है कि यह पल देश को सबसे पहले रखने वाले शासन, काम में ईमानदारी और हर नागरिक की बिना थके सेवा के प्रति पीएम मोदी के गहरे कमिटमेंट को दर्शाता है.
पीएम मोदी ने 8,931 दिनों का कार्यकाल पूरा किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी. उससे पहले वे 4600 दिन तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे थे. उनके कार्यकाल को दो भागों में बांटा जा सकता है पहला गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर और दूसरा देश के प्रधानमंत्री के रूप में. नरेंद्र मोदी ने पहली पहली बार 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. उसके बाद वे लगातार गुजरात के मुख्यमंत्री रहे. उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 से 22 मई 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शासन किया, जिसकी कुल अवधि लगभग 12 साल और 7 महीने हैं, जो 4600 दिनों के बराबर होते हैं. उसके बाद 2014 में वे देश के प्रधानमंत्री बने और अभी भी वे देश के प्रधानमंत्री हैं, यह उनका तीसरा कार्यकाल है. प्रधानमंत्री के तौर पर उन्होंने 11 साल और 10 महीने पूरे कर लिए हैं, जो दिनों में 4300 के बराबर हैं. अगर उनके दोनों पदों के कार्यकाल को जोड़ा जाए तो यह लगभग 24 साल 5 महीने (8931 दिन) हो जाते हैं. इस लिहाज से नरेंद्र मोदी ने सरकार के मुखिया के तौर पर राजनीति में एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है.
| पद | स्थान | कार्यकाल | कुल अवधि |
|---|---|---|---|
| मुख्यमंत्री | गुजरात | 7 अक्टूबर 2001 – 22 मई 2014 | 12 साल 7 महीने ( 4600+ दिन) |
| प्रधानमंत्री | भारत | 26 मई 2014 – 22 मार्च 2026 | 11 साल 10 महीने ( 4300+ दिन) |
ये भी पढ़ें : मां ने 3 बच्चों को सूट–गाॅगल्स पहनाकर तैयार किया, फिर कर दी हत्या; अपनी जान भी दी
ईरान ने 4000 KM दूर अमेरिकी मिलिट्री बेस पर दागी मिसाइल, ट्रंप की उड़ाई नींद
कनाडा जा रहा एयर इंडिया का विमान, 7 घंटे हवा में रहने के बाद क्यों वापस दिल्ली लौटा?
ईरान युद्ध में भारत के पश्चिमी तट का इस्तेमाल करेगा अमेरिका? जानिए वायरल खबर की सच्चाई
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










