विवेक रामास्वामी को डोनाल्ड ट्रंप ने दी ये अहम जिम्मेदारी, एच-1बी वीजा पर उनके एजेंडे से भारतीयों को होगा नुकसान

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Vivek Ramaswamy

डोनाल्ड ट्रंप के साथ विवेक रामास्वामी

Vivek Ramaswamy : राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उम्मीदवारों की दौड़ में शामिल रहने वाले विवेक रामास्वामी को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘अमेरिका बचाओ अभियान’ की कमान सौंप दी है. डोनाल्ड ट्रंप की इस घोषणा के बाद विवेक रामास्वामी ने एक्स पोस्ट किया है. उनका पोस्ट यह साफ बता रहा है कि डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी किस तरह से काम करेगा और रामास्वामी के इरादे क्या हैं.

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Vivek Ramaswamy : अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रशासन में पहले भारतवंशी विवेक रामास्वामी को जगह दी है. वे टेस्ला के मालिक एलन मस्क के साथ मिलकर डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी का नेतृत्व करेंगे. डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी ब्यूरोक्रेसी की सफाई के लिए भारतवंशी विवेक रामास्वामी पर भरोसा किया है. ट्रंप ने विवेक रामास्वामी को देशभक्त अमेरिकन बताया है और एलन मस्क को ग्रेट मस्क.

विवेक रामास्वामी को मिली ब्यूरोक्रेसी पर लगाम कसने की जिम्मेदारी

डोनाल्ड ट्रंप ने डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी को अमेरिका बचाओ आंदोलन के लिए जरूरी बताया है. उनका यह दावा है कि यह विभाग नौकरशाही की मनमानी पर लगाम कसेगा और अनावश्यक खर्चों में कटौती भी करेगा. विवेक रामास्वामी और एलन मस्क बाहर से सरकार के कामकाज पर कड़ी नजर रखेंगे. सरकारी खर्चों पर लगाम कसने और बजट प्रबंधन में भी इनकी भूमिका रहेगी.

विवेक रामास्वामी ने डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और कहा है कि वे किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतेंगे. उन्होंने कहा है कि  DOGE (डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी) जल्द ही गवर्मेंट वेस्ट, धोखाधड़ी और दुरुपयोग के उदाहरणों को सामने लाना शुरू कर देगा. अमेरिकियों ने इसी तरह के कठोर सरकारी सुधार के लिए वोट किया है और वे इस बात को जानने और इसमें सुधार करने के भागीदार बनने के हकदार भी हैं.  हम नरमी से काम नहीं करेंगे. उन्होंने बताया है कि DOGE के कामकाज में पूरी पारदर्शिता रहेगी.

केरल से है विवेक रामास्वामी का नाता

विवेक रामास्वामी के माता-पिता का संबंध केरल से हैं. विवेक के पिता वी गणपति रामास्वामी हैं, जिन्होंने कालीकट के एनआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और उसके बाद वे अमेरिका चले गए थे. उनकी मां का नाम गीता रामास्वामी है, जिन्होंने मैसूर मेडिकल काॅलेज से पढ़ाई की थी और अमेरिका में एक मनोचिकित्सक के तौर पर काम किया. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार रामास्वामी के पिता गणपति रामास्वामी अभी भी भारतीय नागरिक हैं, जबकि उनकी मां ने अमेरिका की नागरिकता ले ली है. 

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विवेक रामास्वामी का जन्म अमेरिका के ओहियो में हुआ है और यहीं से उनकी पढ़ाई-लिखाई भी हुई है. वे भारतीय रीति-रिवाजों से अब भी जुड़े हैं और अकसर अपने माता-पिता के साथ भारतीय पर्व-त्योहारों के अवसर पर मंदिर जाते हैं. 39 साल के विवेक रामास्वामी एक इंटरप्रेन्योर हैं, जिन्होंने हार्वर्ड और येल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की है और उसके बाद उन्होंने एक एसेट मैनेजमेंट फर्म बनाया था. उनकी बायोटेक कंपनी रोयवेंट साइंसेज अब सात अरब डॉलर की कंपनी हो चुकी है. विवेक की शादी भी एक भारतवंशी अपूर्वा से ही हुई है, जो ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में सर्जन और प्रोफेसर हैं. उनके दो बेटे भी हैं.

विवेक रामास्वामी के एजेंडे से भारतीयों को हो सकता है नुकसान

विवेक रामास्वामी के एजेंडे में अमेरिका फर्स्ट है. यही वजह है कि उनके एजेंडे में कई ऐसी बातें हैं जिनसे भारतीयों को नुकसान हो सकता है और उनमें सबसे प्रमुख है- एच-1बी वीजा को खत्म करने का प्रोग्राम. विवेक रामास्वामी इस वीजा को खत्म करना चाहते हैं, जिसका उपयोग कर कई भारतीय अमेरिका में अच्छी नौकरी पाते हैं. इस वीजा का उपयोग अमेरिका में विदेशी कुशल कर्मचारियों को भर्ती करने के लिए कंपनियों द्वारा किया जाता है. 

विवेक के एजेंडे में यह भी शामिल है कि रूस-यूक्रेन युद्ध बंद हो, क्योंकि यह अमेरिका के हित में है. वे यह भी चाहते हैं कि बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखा जाए. उनका यह मानना है कि यह बच्चों को डिजिटल फेंटानिल देने के समान है. फेंटानिल एक दर्द निवारक दवा है, जिसका प्रयोग करने से तत्काल तो अच्छा महसूस होता है, लेकिन बाद में इंसान के मृत्यु की भी आशंका होती है. 

विवेक कई विभागों को बंद करने की कर चुके हैं सिफारिश

विवेक की राय यह है कि कई सरकारी विभागों और एजेंसियों की कोई जरूरत नहीं है, इसलिए उन्हें बंद कर देना चाहिए. विवेक की इसी सोच को देखते हुए उन्हें ट्रंप ने DOGE का नेतृत्व सौंपा है. वे यह भी चाहते हैं कि मतदान के अधिकार की आयुसीमा 25 साल कर दी जाए. 18 साल की उम्र में उन्हीं लोगों को वोट का अधिकार मिले जो अमेरिका के प्रति अपना समर्पण साबित कर चुके हों.

कौन है विवेक रामास्वामी?

अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी प्रशासन में पहले भारतवंशी विवेक रामास्वामी को जगह दी है. वे टेस्ला के मालिक एलन मस्क के साथ मिलकर डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी का नेतृत्व करेंगे.विवेक रामास्वामी एक इंटरप्रेन्योर हैं, जिन्होंने हार्वर्ड और येल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी की है और उसके बाद उन्होंने एक एसेट मैनेजमेंट फर्म बनाया था. उनकी बायोटेक कंपनी रोयवेंट साइंसेज अब सात अरब डॉलर की कंपनी हो चुकी है.

भारत के किस राज्य से है विवेक रामास्वामी का संबंध?

विवेक रामास्वामी का संबंध भारत के केरल राज्य से है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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